कब होता है एक्सीडेंट और कौन बचाता है मरने से Accidents

किसी भी कुंडली में भावों के उप नक्षत्र भाव स्थित ग्रहों से अधिक बलशाली होते हैं। कुंडली के 4,8,12 भावों के उप नक्षत्रों के दशा, अंतर, प्रत्यंतर में दुर्घटनाएं होती हैं, जैसे गिरना, अंग भंग होना या सड़क दुर्घटना आदि।

ये दुर्घटनाएं तभी होती हैं, जब चंद्र भी 4,8,12 भावों के उप नक्षत्रों की राशि, नक्षत्र या उप नक्षत्र पर गोचर करता है। यदि 4,8,12 भावों के उप नक्षत्र मारक या बाधक भावों का सूचक होते हैं तो दुर्घटना में मृत्यु हो जाती है।

मेरे एक परिचित अपनी जन्म कुंडली जो कृष्णमूर्ति पद्वति से बनी थी, मेरे पास लेकर आए। कुंडली में गुरु दशा, शुक्र अंतर तथा बुध का प्रत्यंतर चल रहा था। मेरी नजर 4,8,12 भावों के उप नक्षत्रों पर पड़ी, वह भी गुरु, शुक्र, बुध ही थे।

मैंने उन सज्जन से कहा कि बुध के प्रत्यंतर में आप स्कूटर, वाहन आदि न चलाएं, दुर्घटना होना प्रायः निश्चित है। वह कहने लगे कि अरे छोड़िये साहब, बीस सालों से स्कूटर चला रहा हूं, एक खरोंच तक नहीं लगी है कभी।

मैंने कहा कि यह तो समय ही बतायेगा। वह चले गए। तीन दिन बाद मुझे किसी ने बताया कि उन सज्जन का रात को 8 बजे एक्सीडेंट हो गया है। एक बच्चे को बचाने में उनका स्कूटर बिजली के खंभे से टकरा गया और वह अस्पताल में हैं। उनकी बायीं आंख चली गयी है। मैंने रात आठ बजे की कुंडली बनायी और पाया कि चंद्र मीन राशि में रेवती नक्षत्र में और शुक्र के उप नक्षत्र में था।

जो 4,8,12 भावों के उप नक्षत्र थे। लग्न भी धनु थी, जिसका स्वामी गुरु, नक्षत्र शुक्र व उप नक्षत्र बुध था, जो उन सज्जन की कुंडली में 4,8,12 भावों के उप नक्षत्र हैं।

नोट-4,8,12 भावों के उप नक्षत्र यदि शुक्र, शनि,शुक्र या शुक्र, बुध, शुक्र या चंद्र, सूर्य, चंद्र या चंद्र, मंगल, चंद्र या शनि, बुध, शनि हों तो ऐसे जातक के जीवन में कोई छोटी या बड़ी दुर्घटना नहीं होती है। जैसे शुक्र, शनि, शुक्र, क्योंकि शुक्र की राशियों 2 एवं 7 में शनि का कोई नक्षत्र नहीं होता और शनि की राशियों 10 एवं 11 में शुक्र का नक्षत्र नहीं होता है। इसी प्रकार उपरोक्त अन्य योग या कांबिनेशन वाले एक ग्रह की राशि में दूसरे ग्रह का नक्षत्र नहीं होता है।

पुनः यदि 1,5,9, भावों के उप नक्षत्रों के भाव में यदि उनका नक्षत्र हो तो किन्हीं भी परिस्थिति में अप्राकृतिक व असामयिक मृत्यु नहीं होती है। जैसे यदि 1,5,9 भावों के उप नक्षत्र बुध, शुक्र, शनि हों तो उसकी असामयिक मृत्यु नहीं होगी, क्योंकि बुध के घर मिथुन में गुरु का नक्षत्र पुनर्वसु होता है और गुरु के घर मीन में बुध का नक्षत्र रेवती होता है तथा शनि के घर कुंभ में गुरु का नक्षत्र पूर्वाभाद्रपद होता है।

यदि 1,5,9 भावों के उप नक्षत्र शनि, बुध, शनि हों तो इनके भावों में दूसरे का नक्षत्र नहीं होता है, इसका अर्थ है कि ऐसे ग्रहों में जातक का जीवन बचाने की क्षमता नहीं होती।

इनसेट बाक्स

जन्म समय सही करना

जब कभी औजारों से काम करते समय यदि कहीं चोट लग जाए या चाकू या ब्लेड से उंगली कट जाए तो तत्काल उस समय को नोट कर लें। उस समय के जो लग्न स्वामी, नक्षत्र स्वामी तथा उप नक्षत्र स्वामी होंगे, वही आपकी कुंडली में 4,8,12 भावों के उप नक्षत्र होंगे। यदि न हों तो कुंडली में लग्न को थोड़ा आगे-पीछे कर लें, ताकि 4,8,12 भावों के उप नक्षत्र वही हो जाएं, जो चोट लगते समय की कुंडली में लग्न के राशि स्वामी, नक्षत्र स्वामी और उप नक्षत्र स्वामी थे।

आपकी कुंडली का जन्म समय एकदम एक्यूरेट हो जाएगा।

उदाहरण के लिए एक कुंडली देखिये-

जन्म दिनांक-8.12.1973, समय- प्रातः 5.48, स्थान-वृंदावन। इनकी कुंडली में 4,8,12 भावों के उप नक्षत्र मंगल, शनि व चंद्र हैं। इनकी चंद्र दशा, शनि अंतर व मंगल का प्रत्यंतर 20.06.2004 से शुरू हुआ। दिनांक 21.6.2004 को चंद्र कर्क राशि, स्वामी चंद्र, पुष्य नक्षत्र स्वामी शनि तथा मंगल के उप नक्षत्र में आते ही दर्घटना दे देगी।

मैंने इस सज्जन को जो उस समय असम में थे, 15 जून 2004 को फोन से सूचित कर दिया था कि वह 21 जून 2004 को दोपहर तक किसी वाहन का प्रयोग न करें और घर में या आफिस में ही रहें। लेकिन मुझे दो दिन बाद पता चला कि अचानक उनके अफसर ने उन्हें कहीं तत्काल विजिट पर जाने को बोला और रास्ते में उनका एक्सीडेंट हो गया।

– रवींद्र नाथ चतुर्वेदी