केपी पद्धति – परिचय (भाग-५)

इस आलेख के भाग-४ में आपने भाव-१ से भाव-६ तक का विवरण देखा। इस भाग में भाव-७ से भाव-१२ तक भावों से संबन्धित बातों का विवेचन किया जा रहा है।

भाव-७

विवाह, कानूनी संबंध, मुकद्दमेबाजी, विदेशी मामले, जुर्माना, ठेका, यात्रा-विराम, विदेश में प्रभाव और वहाँ प्राप्त किया जाने वाला मान-सम्मान एवं प्रतिष्ठा, मारक स्थान, खोई संपत्ति का पुन: प्राप्त होना, चोर का विवरण, सार्वजनिक बैठकें, अंतर्राष्ट्रीय व्यापार, अंतर्राष्ट्रीय संबंध, माता की अचल संपत्ति और वाहन क्योंकि यह माता के स्थान ४ से चतुर्थ है, गोद लिया या द्वितीय बच्चे का जन्म, गुप्त शत्रु, कठिनाई, मृत्यु, द्विस्वभाव राशि लग्न में जन्मे जातक के लिए बाधक स्थान, पिता के मित्र और उनके साथ साझेदारी, इत्यादि बातों का अध्ययन भाव ७ या उसके सब-लॉर्ड से किया जाता है ।

भाव-८

आयुष्य, मृत्यु, दूसरी शादी क्योंकि सप्तम का मारक स्थान और भाव २ से सातवाँ है, आग, दुर्घटना, प्राकृतिक या अप्राकृतिक मृत्यु, आत्महत्या, रहस्य, दुख, विपत्ति, संघर्ष, बाधा, हानी, निराशा, पराजय, विलंब, गलत कार्य, चोरी, डकैती, लड़ाई झगड़ा, गलत आरोप, सम्मान-हानि, दुश्मन से खतरा, भ्रष्टाचार, सर्जन, चिकित्सा अधिकारी, स्वास्थ्य निरीक्षक, बूचड-खाना, कसाई, मृत्यु-दर, संक्रामण, बाढ़, अकाल, रोग, भूकंप, प्राकृतिक आपदा, विदेशों के साथ वित्तीय संबंध, देश का आयात निर्यात, दूसरे देश का क्षेत्र, समर्पण, विदेशी ऋण, सार्वजनिक ऋण, ब्याज-दर, सार्वजनिक बिक्री, बीमा का पैसा, यात्रा में कठिनाईयाँ, इत्यादि बातों का अध्ययन भाव ८ या उसके सब-लॉर्ड से किया जाता है।

भाव-९

बुद्धि, विश्वास, पूजा, ईश्वर के प्रति समर्पण और विश्वास, दर्शन, भक्ति, धार्मिक और दार्शनिक मान्यताएँ, भाग्य, आविष्कार, खोज, अन्वेषण, पवित्र धार्मिक स्थल, धार्मिक स्थलों की यात्रा – तीर्थ यात्रा, ध्यान, अन्तर्ज्ञान, सपने, आध्यात्म, पिता, गुरु, जीवनसाथी के साथ की गई छोटी यात्रा, कानून, कानूनी विभाग, लंबी हवाई/समुद्री यात्रा, सुदूर संचार, पुस्तक प्रकाशन, अंतर्राष्ट्रीय मामले, आयात-निर्यात, राष्ट्रीय व्यापार, ध्यान, दान, बलिदान, अच्छा आचरण, कूँआ-तालाब-नलकूप, नौकरों के वाहन, बच्चों का सुख, खेल से प्राप्त सुख, सट्टा-लाभ, माता की बीमारी, जीवनसाथी के छोटे भाई-बहन, स्थिर राशि लग्न में उत्पन्न जातकों के लिए बाधकस्थान इत्यादि का विचार भाव-९ से या उसके सब-लॉर्ड से किया जाता है।

भाव-१०

प्रतिष्ठा, चरित्र, नैतिकता, सम्मान, गरिमा, सार्वजनिक सम्मान, पेशा, व्यापार, व्यवसाय, नाम-प्रसिद्धि, शक्ति, आचरण, सफलता और स्थिति, यश, महत्वाकांक्षा, अधिकार, सांसारिक गतिविधियां एवं जिम्मेदारियाँ, प्रचार, नियोक्ता, प्रगति, वरिष्ठ पद के लोग, सरकार, न्यायाधीश, सरकार से प्राप्त सम्मान, डॉक्टर, दावा, सम्मान, अधिकार की मुहर, शिक्षण, जांघें, दत्तकपुत्र, सेवा-निवृत्ति, बच्चों के सेहत संबंधी मामले, बच्चों द्वारा लिया गया क़र्ज़, माता और पिता के लिए मारक स्थान, और माता के विरोधियों इत्यादि का विचार भाव-१० या उसके सब-लॉर्ड से किया जाता है।

भाव-११

मित्र, साथी, समुदाय, प्रशंसक, सलाहकार, शुभ-चिंतक, आय, सपनों के साकार होने, इच्छाएँ, ईश्वर के प्रति समर्पण, भाग्य, लाभ, कार्यों में सफलता, मुनाफा, लेखन, खुशी, समृद्धि, प्रगति, खुश-खबरी, रोग-मुक्ति, बड़े भाई-बहन, पैतृक चाचा-चाची, जीजा जी, बायाँ कान, बायाँ हाथ, घुटने, दाहिना पैर, माँ की आयु, पिता की छोटी यात्रा, बच्चे का जन्म, बच्चों के प्रतिद्वंद्वी, अस्पताल से छुट्टी, दुश्मन पर विजय, आभूषण, रेशम, अंतर्राष्ट्रीय मित्रता, सरकारी नीतियाँ एवं नियोजन, सुविधाओं का आदान प्रदान, सरकारी ऋण, बिजली कंपनी, गैस कंपनी, संग्रहालय, संगठन, चर राशि लग्न हेतु बाधक-स्थान आदि का विचार भाव-११ या उसके सब-लॉर्ड से किया जाता है ।

भाव-१२

घाटा, व्यय, अस्पताल, कारावास, नर्सिंग होम, प्रसूति गृह, मानसिक अस्पताल, परिवार से दूरी, बहुत दूर के स्थान, विदेश, शत्रु-भाय, गुप्त-स्थान/घर, जीवन का छुपा हुआ पहलू, दुख, पाप, गरीबी, उत्पीड़न, सीमाएं, प्रतिबंध, क्रोध, मानसिक आघात, आंदोलन, पैर, बाईं आँख, शारीरिक चोट, अंग-भंग, भाय, रहस्य, एकांतवास, आत्महत्या, गुप्त-योजनाएँ और षड्यंत्र, ईर्ष्या-द्वेष-कपट, साजिश, छल, धोखाधड़ी, बलात्कार, जहर, निर्वासन, प्रत्यर्पण, बाधाएँ, दुर्भाग्य, अनदेखी मुसीबतें, अपव्यय, शैया-सुख, धोखा, मुकद्दमेबाजी, खतरे, कठिनाईया, जन्म स्थान से दूरस्थ स्थान पर सफलता, माँ के लंबे सफर, जीवनसाथी की बीमारी, छोटे भाई-बहन का पेशा, पिता की स्थायी संपत्ति, लोकप्रियता एवं समृद्धि, बलिदान, सामाजिक बाधाएँ, दान इत्यादि बातों का विचार भाव १२ या उसके सब-लॉर्ड से किया जाता है।

यदि कोई ग्रह या दशा-स्वामी या फिर भाव का सब-लॉर्ड ग्रह अ. के नक्षत्र में स्थित है तो जिन भावों का ग्रह अ. स्वामी है और जिस भाव में ग्रह अ. स्थित है – उन भावों से संबन्धित परिणाम जातक को उस ग्रह की दशांतर्दशा में प्राप्त होंगे जब गोचर में कोई ग्रह उन भावों के कार्येशों से भ्रमण करेगा।

ये परिणाम धनात्मक होंगे या ऋणात्मक, इसका निर्णय दशांतर्दशा स्वामी के सब-लॉर्ड से किया जाएगा, यदि वह शुभ-भावों से संबन्धित है तो शुभ अन्यथा अशुभ परिणाम प्राप्त होंगे। इस प्रकार इस आलेख में केपी के माध्यम से फलकथन करने के लिए आपको बारह भावों के कारकत्व से परिचित करवाया गया ।

इस परिचय-माला के अगले भाग में हम भावों, और ग्रहों से संबन्धित केपी के कुछ अन्य महत्वपूर्ण सूत्रों का अध्ययन करेंगे ।