कैसा है आपका बैंक बैलैंस your bank balance

कृष्णमूर्ति ज्योतिष के उप या नक्षत्र स्वामी किस प्रकार से योग करके फल प्रदान करते हैं, केपी ज्योतिष के इतिहास में यह पहली बार पाठकों के समक्ष लाया जा रहा है।

1- मेष लग्न की कुंडली में पंचम कस्प का उपस्वामी या उसका नक्षत्र स्वामी सूर्य हो अथवा पंचमेश सिंह का सूर्य और 11 वें कस्प में गुरु स्थित हो तो जातक पैसे वाला होता है।

2- लग्न में लग्न का उप या नक्षत्र स्वामी, धनेश या दूसरे का उप या नक्षत्र, लाभेश या ग्यारवे भाव का उप या नक्षत्र अथवा नवम का उप या नक्षत्र स्वामी उच्च राशि का हो तो जातक के पास हमेशा अपार धन संपदा रहती है।

3-लग्न एवं दूसरे कस्प के उप या नक्षत्र एक-दूसरे के उप या नक्षत्र स्वामी हों और अगर एक-दूसरे के घर में जाकर विराजमान हो जाएं तो ऐसे जातक का बैंक अकाउंट हमेशा आकर्षक ढंग से भरा रहता है।

4-कन्या लग्न में राहू, शनि, मंगल, शुक्र स्थित हों अथवा इनमें से कोई एक लग्न का उप स्वामी होकर शेष तीन में से कोई दो नक्षत्र और उप उप स्वामी होकर लग्न में हों तो जातक अरबपति होता है।

5- चार, नौ एवं ग्यारहवें कस्प के उप या नक्षत्र स्वामी एक-दूसरे के उप या नक्षत्र हों और तिगड्डा बनाकर दूसरे भाव में बैठ जाएं तो भी जातक को धनवान बनने से कोई नहीं रोक सकता।

6- दूसरे व एकादश कस्प का उप या नक्षत्र स्वामी चौथे भाव में हो और चौथे भाव का उप या नक्षत्र मालिक या राशि मालिक शुभ ग्रह की राशि में शुभ ग्रह से युत हो तो ऐसे लोग अकस्मात ही थोड़े से समय में पैसे वाले बन जाते हैं और दूसरे लोग उनकी प्रगति से ईर्ष्या करते हैं।

7- द्वितीय भाव एवं चतुर्थ के उप व नक्षत्र स्वामी एक साथ शुभ ग्रह की राशि में या शुभ ग्रह से युत होकर कुंडली में बैठ जाएं तो ऐसा जातक अल्प मेहनत करके ढेर सारी संपत्ति एकत्र कर लेता है।

8- नवम कस्प का उप या नक्षत्र किसी ग्रह के उप या नक्षत्र में न हो और वह 1,2,3,6,10 या 11 में हो, लग्न स्वग्रही हो या मूल त्रिकोण व उच्च राशि में होकर पाप ग्रहों के साथ न हो तो ऐसा जातक अपार संपदा के साथ-साथ समाज में यश प्राप्त करता है।

9- पंचम कस्प का उप या नक्षत्र स्वामी शुक्र और चन्द्र हो और इनकी पंचम भाव पर सातवीं द्रष्टि हो जाए तो ऐसा जातक बिना कुछ किये ही फ़टाफ़ट धनवान बन बैठता है।

10- मंगल और चन्द्र का एक-दूसरे के उप या नक्षत्र स्वामी होना अतवा युति और आपस में द्रष्टि होना भी व्यक्ति को लखपति बनाती है। आज के युग में इस योग के स्वामियों पर पचास लाख से ज्यादा की संपत्ति तक देखी गयी है, लेकिन यह योग चरित्र की बलि ले लेता है।

ऐसा करने से आता है धन

1- पूरनमासी के दिन सत्य नारायण भगवान की कथा परिजनों के बीच कराते रहें, इससे परिवार में सुख-समृद्धि आती है।

2- श्वेतार्क गणपति का नियमित पूजन करें, विशेष रूप से रवि पुष्य अथवा गुरु पुष्य के दिन गणपति पूजन से माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है।

3- संकट नाशन गणपति स्त्रोत, कनकधारा स्त्रोत और श्रीसूक्त लक्ष्मी सूक्त के नियमित पाठ गुरु पुष्य से शुरू करें। इससे कभी हाथ तंग नहीं रहेगा। अगर स्फटिक के श्री यंत्र की पूजा इस पाठ के साथ की जाये तो आर्थिक विपन्नता दूर हो जाती है और अपव्यय पर भी रोक लग जाती है।

4- भगवान विष्णु, भगवान श्री कृष्ण एवम तिरुपति बालाजी की नियमित पूजा और राधा कृपा कटाक्ष स्त्रोत का पाठ करने से भी गृह क्लेश दूर होता है और धन संपदा बढती है।

5- दक्षिणावर्ती शंख घर में रखने से पैसा आता रहता है।

6- सावन-भादों में चमक-नमक की रुद्री का पाठ और शिव अभिषेक करने से आर्थिक विपन्नता नहीं रहती।

7- श्राद्धों में पुरखों का स्मरण, ब्राह्मण को भोजन कराने से भी गरीबी दूर होती है। नवरात्रि में दुर्गा सप्तशती का विधिवत पाठ करने से आर्थिक मजबूती बनी रहती है।

इनसे करें बचाव

1-मंगलवार के दिन अथवा जब कुंडली में मंगल का सूक्ष्म व प्राण दशा चल रही हो, कभी भी उधार या कर्ज न लें। इसदिन लिया धन आसानी से चुकता नहीं होता है।

2- बुधवार अथवा जब कुंडली में बुध का सूक्ष्म या प्राण दशा चल रही हो, उस दिन किसी सगे सम्बन्धी को भी कर्ज न दें, इस दिन हाथ से निकली चीज मुश्किल से ही वापस आती है। इस दिन दान देना अच्छा होता है।

3- सूर्य संक्रांति के पुण्य काल में ऋण कदापि न लें, यानि संक्रांति के साढ़े छह घंटे पहले से साढ़े छह घंटे बाद तक। किसी जरुरत मंद का सहयोग कर सकें तो बेहतर होता है। हर महीने की 14 से16 तारीख के बीच सूर्य संक्रांति होती है।

4- रविवार के दिन चन्द्र का हस्त नक्षत्र हो अथवा आपकी कुंडली में चंद्र का प्राण हो और उस दिन रविवार हो तो भी उधार या कर्ज से बचें।

5- एकादशी के दिन और अमावस्या के दिन धन का निरादर नहीं करें। संभव हो तो इन दोनों दिन और जब भी कुंडली में गुरु की प्राण दशा हो, भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी का पूजन करें।

6- दिन के समय सम्भोग न करें। किसी अमावस्या और शुभ तिथियों को तो कभी नहीं। रसोई पकने के तत्काल बाद गाय को एक रोटी खिलाएं और संभव हो तो पांच आटे की लोई खिलाना शुरू करें।

इससे वंश वृद्धि होती है, अपव्यय रुकता है और धन की कमी नहीं रहती। सबसे महत्वपूर्ण बात कि पुण्य आपके भाग्य खाते में इकट्ठे होते रहते हैं, जो आड़े वक्त में काम आते हैं। यह हमारा अनुभूत प्रयोग है, जो हजारों परिवार आजमा रहे हैं और सुखी हैं।

7- धन आने के साथ ही पंद्रह अनर्थ आ जाते हैं। इनसे बचेंगे तो लक्ष्मी का स्थाई वास हो जाता है, अन्यथा धन का सुख नहीं मिलता है। ये पंद्रह अनर्थ हैं-चोरी, हिंसा, झूठ, दंभ, काम, क्रोध, गर्व, मद, भेद, बुद्धि, बैर, अविश्वास, स्पर्धा, लम्पटता, जुआ और शराबखोरी।

केपी पद्वति के प्रखर और विद्वत ज्योतिषी इस शोध से सर्वथा असहमति प्रकट करेंगे, हम यह जानते हैं, लेकिन हमारा निवेदन है कि इन सूत्रों को आजमा कर देखने से पहले इन्हें नजरंदाज और अस्वीकृत करके केपी एस्ट्रो साइंस की टीम का मनोबल न गिराएं।

लेखक- शिप्रा द्विवेदी