थ्योरी ऑफ़ टीएसपी Theory of TSP

यह सिद्धांत बहुत प्रभावकारी है और कोई काम बनेगा या नहीं, यह जानने के लिए सबसे अच्छा तरीका है। बहुत बार ऐसा होता है जब हम किसी सवाल का जवाब केवल हां और ना में जानना चाहते हैं।

जैसे मान लीजिए कि आपने सवाल किया कि “क्या मुझे एबीसी कंपनी में जाब मिलेगा?” “क्या मुझे आज क्लब की सदस्यता मिल जाएगी?” “क्या मुझे एग्जाम में 80 से 90 के बीच नंबर मिल जाएंगे?” इत्यादि। इस तरह के सवालों के लिए थ्योरी आफ शार्ट प्रडिक्शन यानी टीएसपी बढ़िया तकनीक है।

गुलबर्ग और टीएसपी सिद्धांत में अंतर

टीएसपी तकनीक गुलबर्ग सिद्धांत का नया रूप है। लेकिन दोनों में बड़ा अंतर भी है। गुलबर्ग सिद्धांत में जब लग्न का उप स्वामी चंद्रमा का नक्षत्र हो तो सवाल सच होता है या उसका सकारात्मक परिणाम आता है।

गुलबर्ग सिद्धांत में बाद में यह भी जोड़ा गया कि जब लग्न का उप स्वामी फारच्यूना का नक्षत्र स्वामी हो तो जवाब सकारात्मक होता है, लेकिन टीएसपी में उप स्वामी को कोई जगह नहीं दी गयी है, जबकि गुलबर्ग थ्यौरी उप स्वामी पर ही आधारित है। टीएसपी तकनीक केवल नक्षत्र स्वामी पर ही आधारित नहीं है, बल्कि उप उप स्वामी और लग्न नक्षत्र और उप उप स्वामी पर भी आधारित है।

डा. कार फार्च्यूना देखने का सुझाव नहीं देते हैं, पर हमें इस पर शोध जारी रखने चाहिए कि क्या फार्च्यूना से संबंध होने पर भी सकारात्मक जवाब मिल सकता है।

टीएसपी में ऐसे करते हैं ग्रहों की गणना

भविष्यफल बताने के लिए इस तकनीक को इस्तेमाल करते समय हम सुबह 5.30 बजे भारतीय भूमध्य रेखा (82 डिग्री 30 मिनट) से गणना करते हैं। उदाहरण के लिए कोई अपना काम आगरा में शुरू करे या अहमदाबाद में, बड़ोदा में या बैंगलोर में, चेन्नई में अथवा चंडीगढ़ में।

उस समय 16.25 बजे हों या 17.25 बजे हों। सुबह के 7 बजे हों या 8; सुबह के 10 बजे हों या रात के 10 बजे हों। गणना करते समय केवल सुबह 5.30 बजे का ही टाइम लेना है। हमें केवल होररी लग्न की जरूरत ही पड़ती है, अन्य कस्प भावों की गणना की जरूरत नहीं पड़ती।

हमें केवल यह देखना होता है कि सुबह 5.30 बजे ग्रहों की क्या स्थिति थी। चाहें हम भारत के किसी भी शहर में टीएसपी से गणना कर रहे हों। और हां, दिन का मतलब होता है पूरे 24 घंटे। यानि कि सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक।

मान लीजिए कि हम कोई गणना सुबह के 05.29.59 बजे निकाल रहे हैं तो हम पहले वाले दिन को लेंगे। दूसरे शब्दों में कहें तो इस ग्रह स्थिति को डे राइज प्लेनेटरी इफेक्ट (डीआरपीई) कहा जाता है। (नोट: डा. कार ने एक सिद्धांत प्रतिपादित किया है, जिसे डीआरपीई नाम से जाना जाता है। मैं भविष्य में इस सिद्धांत का भी उल्लेख करूंगा)।

डा. कार ने एक बार टीएसपी के बारे में कहा था “मैं चकित हूं कि सुबह 5.30 बजे की गणना से यह सिद्धांत कैसे सटीक काम करता है। हालांकि कुंडली की गणना का समय कुछ भी हो। डीआरपीई वास्तव में ज्योतिष के क्षेत्र में एक आश्चर्य है और यह आने वाले समय में ज्योतिषीय गणना के पैटर्न को बदलकर रख देगा।”

अब मैं कृष्णमूर्ति सिस्टम समूह के सदस्यों के दो सवालों पर स्थिति स्पष्ट करना चाहूंगा।

1) जैसे कि दिन निकलने का क्या मतलब है? क्या हमें दिन निकलने का स्थानीय समय लेना चाहिए?

2) क्या दिन निकलने का मतलब सूर्योदय से है? जी नहीं, ये दोनों ही तर्क गलत हैं। हमें भारतीय भूमध्य रेखा का समय लेना
चाहिए।

उदाहरण के लिए कोई ज्योतिषी आगरा में बैठकर गणना करे या अहमदाबाद में। बड़ौदा में हो या बैंगलोर में। चेन्नई में हो अथवा चंडीगढ़ में। गणना सायं 4.25 बजे की जाए या 5.25 बजे; सुबह 7 बजे हों या 8, सुबह के 10 बजे हों अथवा रात के 10 बज रहे हों; हमें केवल सुबह के 5.30 बजे की ग्रह स्थिति ही देखनी है। क्योंकि केवल हमें होररी लग्न की जरूरत होती है, न कि अन्य कस्प भावों की।

यदि कोई ज्योतिषी मान लीजिए कि भारत में नहीं है, तो कहां का टाइम लेंगे। तब आप जिस देश में बैठकर गणना कर रहे हैं, वहां का टाइम लीजिए और होररी लग्न निकालिए। मान लीजिए कि गणना करते समय आप लंदन में हैं तो आपको 00 घंटा 00 मिनट लेना है, क्योंकि यह इंग्लैंड का मैरिडियन टाइम जोन है।

दूसरे शब्दों में कहें तो ज्योतिषी किसी भी देश में बैठकर टीएसपी की गणना कर सकता है, उसे केवल उसी देश का मेरिडियन टाइम लेना है। अब यह स्पष्ट हो जाना चाहिए कि ज्योतिषी को गणना के लिए अपने देश का मेरिडियन टाइम लेना है, न कि स्थानीय समय या सूर्योदय समय।

टीएसपी में निम्न संख्या के आधार पर गणना

ए: 1 से 249 तक नंबर के उप स्वामी।

बी:1 से 2193 तक नंबर के उप उप स्वामी।

सी:1 से 9 की संख्या पर।

डी: डा. कार ने (सन 2004) में नक्षत्र आधारित 1 से 27 तक नंबर से भी गणना का सिद्धांत दिया।

हम सब लोग कृष्णमूर्ति सिद्दांत पर काम करते हैं, उक्त में से ए और बी सिद्धांत के बारे में जानते हैं, पर सी और डी आधारित गणना हमारे लिए नई है। इसलिए सबसे पहले हम समझने की कोशिश करते हैं कि संख्या 1 से लेकर 9 तक क्या है और क्यों? संख्या 1 से 9 नौ ग्रहों पर आधारित है।

नौ ग्रह, 27 नक्षत्र, नौ उप स्वामी, नौ उप उप स्वामी, ) नौ उपउप उप स्वामी, हम जिस किसी के आधार पर गणना करना चाहें, कर सकते हैं। हमें उप स्वामी विशेष लेना होता है। यदि नंबर उप स्वामी को प्रतिनिधित्व करता है तो उप उप स्वामी भी वही होगा।

यदि नंबर उप उप स्वामी को प्रतिनिधित्व करता है तो उप उप उप स्वामी वही होगा। डा. कार कहते हैं कि सवाल करने के साथ नंबर बताने वाला नहीं जानता कि वास्तव में 1 से 9 अथवा 1 से 2193 इत्यादि नंबर का क्या मतलब है। इसिलए यह ज्योतिषी को फैसला करना चाहिए कि वास्तव में उसे किस नंबर से गणना करनी है। एक लेकर 249 का कोई नंबर पूछना है अथवा 1 से 2193 के मध्य का।

उदाहरण के लिए जातक आठ नंबर बताता है तो ज्योतिषी तय करे कि वह 1 से लेकर 9 के बीच का नंबर लेकर गणना करें या 1 से 249 के मध्य अथवा 1 से 2193 के मध्य। यह पूरी तरह ज्योतिषी के विवेक पर निर्भर करता है। ज्योतिषी स्वतंत्र है कि वह किस आप्शन के बीच जाकर लग्न देखे।

मैं कभी जातक से नहीं कहता है कि वह ए से बी के मध्य कोई नंबर बताए या सी से डी के मध्य। मैं केवल जातक से नंबर पूछता हूं और फिर फैसला लेता हूं कि मुझे इनमें से किस आप्शन पर काम करके उसके सवाल का जवाब देना है।

आप अपने अनुभव के आधार पर आगे बढ़ें। यदि कोई जातक नौ (उप) नंबर बताता है तो उसकी लग्न होगी मेष 110 26’ 40” से 130 20’ 00” डिग्री तक। यानि इस नंबर पर मेष राशि में केतु का पूरा नक्षत्र होगा और यह संयुक्त रूप से होगा मंगल-केतु-बुध।

यदि इसमें उप उप जोड़ेंगे तो उप उप बुध ही होगा। लेकिन यदि नंबर नौ (उप उप) लेते हैं तो यह संयुक्त रूप से मंगल-केतु-केतु-बुध होगा। यदि इसमें उप उप उप पर जाकर गणना करते हैं तो भी यह बुध ही होगा। आप उप उप उप का चयन कर सकते हैं, लेकिन तब आपको उप उप उप पर जाकर ग्रहों की स्थिति की गणना करनी होगी।

संख्या 1 से 9 के उप स्वामी की टेबिल
नंबर:1मंगल-केतु-केतु-केतु
नंबर:2मंगल-केतु-शुक्र-शुक्र
नंबर:3मंगल-केतु-सूर्य-सूर्य
नंबर:4मंगल-केतु-चंद्र-चंद्र
नंबर:5मंगल-केतु-मंगल-मंगल
नंबर:6मंगल-केतु-राहु-राहु
नंबर:7मंगल-केतु-गुरु-गुरु
नंबर:8मंगल-केतु-शनि-शनि
नंबर:9मंगल-केतु-बुध-बुध

कैसे पाएं जवाब

हमें निम्नलिखित तीन शर्तें देखनी हैं। किसी नियम को ज्यादा महत्व देने के लिए कोई विशेष नियम नहीं है। लेकिन हम यहां बहुसंख्यक उत्तरों की जांच करते हैं। यदि दो उत्तर हां में मिलते हैं तो जातक की इच्छा पूरी होगी। यदि दो उत्तर ना में मिलते हैं तो जातक का काम नहीं होता है।

यहां याद रखने की बात यह है कि टीएसपी सिद्धांत में राशि और उप का कोई महत्व नहीं है। कहीं भी रहिए, किसी भी समय गणना करिए, सुबह के साढ़े पांच बजे के टाइम पर ग्रहों की स्थिति वही रहेगी। मुख्य बात यह है कि होररी नंबर का उप उप स्वामी क्या है।

1) सबसे पहले लग्न के उप उप स्वामी को देखिए। यदि होररी लग्न का उप उप स्वामी ए यदि ग्रह बी के उप उप में है तो ग्रह बी के मुताबिक फल मिलेगा। अब ग्रह बी को चंद्र के नक्षत्र स्वामी और उप उप स्वामी से टेली करिए।

यदि ये एक जैसे हैं या टेली कर रहे हैं तो उत्तर हां में समझना चाहिए। (दूसरे शब्दों में ग्रह बी चंद्रमा का नक्षत्र स्वामी या उप उप स्वामी होना चाहिए।

यदि ऐसा नहीं है तो उसे लग्न का नक्षत्र स्वामी और उप उप स्वामी से टेली करिए, यदि टेली हो रहा है, दूसरे शब्दों में ग्रह बी लग्न का नक्षत्र स्वामी या उप उप स्वामी होना चाहिए। ऐसा है तो जवाब हां में है।

2) यदि ए ग्रह बी के नक्षत्र में है। और ग्रह बी चंद्रमा का नक्षत्र स्वामी या उप उप स्वामी है, दूसरे शब्दों में यदि ग्रह बी चंद्र का नक्षत्र या उप उप है तो सवाल का जवाब हां में है।

यदि नहीं है तो इसे लग्न के नक्षत्र या उप उप से टेली करना चाहिए। दूसरे शब्दों में यदि ग्रह बी लग्न का नक्षत्र या उप उप स्वामी है तो जवाब हां में है। (इस विषय पर विस्तृत लेख केपी ई जाइन के फरवरी-मार्च 2007 के संस्करण में प्रकाशित हो चुका है)।

3) अंतिम रूप से चेक करते हैं कि ग्रह ए-लग्न का उप उप स्वामी ग्रह बी के उप उप में हो. ग्रह बी ग्रह सी के नक्षत्र में हो तो इस स्थिति में ग्रह सी निर्णय कारक ग्रह हो जाएगा। इसलिए अब ग्रह सी को देखते हैं। यह चंद्रमा का नक्षत्र स्वामी या उप उप स्वामी होना चाहिए।

यदि है तो दूसरे शब्दों में यदि ग्रह सी चंद्रमा का नक्षत्र स्वामी या उप उप स्वामी है तो जवाब सकारात्मक होगा। यदि नहीं है तो इसे लग्न नक्षत्र से टेली करें। यदि यह लग्न का नक्षत्र स्वामी या उप उप स्वामी है यानि कि यदि ग्रह सी लग्न का नक्षत्र या उप उप स्वामी है तो जवाब सकारात्मक होगा।

टीएसपी में छाया ग्रहों की भूमिका

यदि छाया ग्रह निर्णय कारक हैं (यदि नियम 1 में “बी”; नियम 2 में “बी” और नियम 3 में “सी” छाया ग्रह है), तो हम उस ग्रह को चेक करेंगे, जिसका एजेंट नीचे दी गयी शर्त में कोई छाया ग्रह है।

ए: छाया ग्रह का नक्षत्र; बी: छाया ग्रह का राशि स्वामी; सी: उसके साथ में ग्रह; डी: ग्रह जो छाया ग्रह को देख रहे हैं।
यदि इनमें से एक भी “ए”, “बी”, “सी”, “डी” चंद्रमा के नक्षत्र स्वामी या उप उप स्वामी है अथवा लग्न के नक्षत्र स्वामी या उप उप स्वामी हैं तो जवाब सकारात्मक होगा।

नियम विशेष

1) यदि लग्न का उप उप स्वामी चंद्र है तो परिणाम हमेशा सकारात्मक होगा।

2) यदि चंद्रमा शनि के नक्षत्र में है और चंद्रमा को शनि देख रहा है तो परिणाम हमेशा नकारात्मक होगा। यदि शनि-चंद्र साथ हैं लेकिन सूर्य से कनेक्टेड हैं तो काम देरी से बनेगा।

3) यदि लग्न का उप उप स्वामी चंद्रमा या लग्न का नक्षत्र स्वामी है तो काम बनेगा ही बनेगा।

अब 1 से 9 संख्या के उदाहरण

उदाहरण: 1

सवाल: क्या बरमूदा इस मैच को जीतेगा?

क्रिकेट वर्ल्ड कप, 2007-बरमूडा बनाम बांग्लादेश, 25.3.2007

होररी नंबर-3.

होररी नंबर 3 की लग्न (संख्या 1 से 9) मंगल-केतु-सूर्य-सूर्य

ग्रहों की स्थिति सुबह 5.30 बजे, तारीख 25.3.2007 रविवार
सूर्य 12,10, 6, 10 गुरु शनि शुक्र बुधः

चंद्र 3,0, 34. 50 बुध मंगल बुध शुक्र:
मंगल 10,26. 39,30 शनि मंगल गुरु बुध:

बुध 11,12, 35, 7 शनि राहु बुध बुध:

गुरु 8,25, 41, 0 मंगल बुध राहु शुक्र:

शुक्र 1,14, 40, 1 बुध शुक्र शुक्र गुरु:
शनि (व) 4,24,51,55 चंद्र बुध राहु शनि:

राहु 11,21,24,15 शनि गुरु गुरु चंद्र:
केतु 5,21,24,15 सूर्य शुक्र गुरु चंद्र:

1) लग्न का उप उपस्वामी सूर्य बुध के उप उप में है। राशि एवं उपस्वामी चंद्र है, पर टीएसपी में राशि और उप का कोई महत्व नहीं है। इसलिए नहीं जीतेगा।

2) सूर्य का नक्षत्र स्वामी शनि है, लेकिन दोनों नहीं हैं। इसलिए नहीं जीतेगा।

3) लग्न का उप उपस्वामी सूर्य बुध के उप उप में है, बुध राहु के नक्षत्र में है, लेकिन दोनों नहीं हैं। इसलिए नहीं जीतेगा।
तीनों नियम पूरे हो रहे हैं, इस प्रकार टीएसपी के अनुसार बरमूदा मैच नहीं जीतेगा।

परिणाम: बरमूदा इस मैच को हार गया।

उदाहरण: 2

सवाल: क्या इंग्लेंड इस मैच को जीतेगा?

क्रिकेट सुपर आठ-इंग्लेंड बनाम श्रीलंका

तारीखः 4.4.2007
होररी नंबर: 5
संख्या 5 की लग्न (संख्या 1 से 9) मंगल-केतु-मंगल-मंगल
ग्रह स्थिति सुबह 5.30 बजे, तारीख-4.4.2007
सूर्य 12,19,58,59 गुरु बुध शुक्र चंद्र
चंद्र 7,3,51,23 शुक्र मंगल शुक्र गुरु
मंगल 11, 4,19,9 शनि मंगल शुक्र शनि
बुध 11,25,28,10 शनि गुरु बुध गुरु
गुरु 8,25,54,3 मंगल बुध राहु चंद्र
शुक्र 1,26,35,33 मंगल शुक्र केतु बुध
शनि(व) 4,24,30,4 चंद्र बुध राहु गुरु
राहु 11,20,52,27 शनि गुरु गुरु शुक्र
केतु 5,20,52,27 सूर्य शुक्र गुरु बुध

1)मंगल शनि के उप उप में है। शनि दोनों का नहीं है। इसलिए नहीं जीतेगा।

2)मंगल अपने ही नक्षत्र में है और लग्न के उप उप व चंद्र का नक्षत्र स्वामी है। इसलिए जीतेगा।

3)मंगल शनि के उप उप में है। शनि बुध का नक्षत्र है, लेकिन दोनों का नहीं है। इसलिए नहीं जीतेगा।

1 से लेकर 3 नियम पूरे हुए।

टीएसपी के अनुसार इंग्लेंड यह मैच नहीं जीतेगा।

परिणाम: इंग्लेंड यह मैच हार गया।

Example: 3
World cup cricket Super 8 : AUSTRASLIA vs WEST INDIES 27_3_2007
Will Australia win this match?
HORARY NO: 4 ( FROM 1 TO 9) MAR-KET-MOO-MOO
PLANETRY POSTION AT 5.30 a.m., Date: 27_3_2007

SUN. 12 12 4 56 Jup Sat Moo Sun :
MOON 3 27 3 16 Mer Jup Ven Moo :
MARS 10 28 11 16 Sat Mar Sat Sat :
MERC 11 14 53 57 Sat Rah Ket Jup :
JUP. 8 25 45 6 Mar Mer Rah Sun :
VEN. 1 17 3 44 Mar Ven Moo Ket :
SAT.-R 4 24 46 46 Moo Mer Rah Sat :
RAHU 11 21 17 53 Sat Jup Jup Moo :
KETU 5 21 17 53 Sun Ven Jup Sun :
1) Asc sub sub lord is Moon in his own sub sub. Moon is sub sub of Asc and Moon.= OK.
2) Asc sub sub lord Moon is in the star of Jup. Jup is star lord of Moon. = OK.
3) Asc sub sub lord Moon is in his own sub sub, and Moon is in the star of JUP. Jup is star lord of Moon. = OK.
3 out of 3 rules satisfied.
Hence according to TSP, the answer is YES.
Outcome: Australia won this match

Example: 4
SUPER EIGHT ENGLAND vs SRI LANKA 4-4-2007
Will England win this match?
HORARY NO: 5 ( FROM 1 TO 9) MAR-KET-MAR-MAR
PLANETRY POSTION AT 5.30 a.m., Date 4-4-2007

SUN. 12 19 58 59 Jup Mer Ven Moo
MOON 7 3 51 23 Ven Mar Ven Jup
MARS 11 4 19 9 Sat Mar Ven Sat
MERC 11 25 28 10 Sat Jup Mer Jup
JUP. 8 25 54 3 Mar Mer Rah Moo
VEN. 1 26 35 33 Mar Ven Ket Mer
SAT.-R 4 24 30 4 Moo Mer Rah Jup
RAHU 11 20 52 27 Sat Jup Jup Ven
KETU 5 20 52 27 Sun Ven Jup Mer
1) Mar is in the sub sub of Sat. Sat is not in both = NO.
2) Mar is in his own sta,. and Mar is sub sub lord of Asc and starlord of Moon .=OK.
3) Mar is in the sub sub of Sat. Sat is in the star of Mer. Not in both. = NO.

1 out of 3 rules satisfied.
Hence according to TSP, the answer is NO.
Outcome: England Lost this match