बी.टेक के बाद नौकरी का टेंशन job problem after BTec degree

दिल्ली निवासी एक जातक बी.टेक कर चुकी है और नौकरी न मिलने से भारी तनाव में है। उसने पूछा कि उसकी जाब कब तक लगेगी तो मेरे कहने पर उसने 1 और 249 के बीच में से 112 नंबर दिया। यह 23-10-2010 की बात है। मैंने चंडीगढ़ में दोपहर 1:40 बजे उसकी होररी कुंडली बनायी।

चंद्रमा जाब न मिलने पर तनाव दर्शा रहा था। गुलबर्ग सिद्वांत के अनुसार यदि होररी नंबर का उपस्वामी शासक ग्रहों में चंद्र या लग्न का नक्षत्र स्वामी है तो जातक की इच्छा अवश्य पूरी होगी। इस मामले में होररी नंबर चंद्रमा है और लग्न का नक्षत्र स्वामी भी चंद्र ही है, लिहाजा मैंने उससे कहा कि उसको जाब अवश्य मिलेगा।

होररी कुंडली में लग्न जातक के प्रयासों को इंगित करती है। इस केस में लग्न का उप स्वामी चंद्र 11 भाव का स्वामी है। यह केतु के नक्षत्र में है जो 10 भाव में है। केतु, बुध की राशि में 2 भाव में है और 10 का स्वामी है। यह गुरु के उप में है, जो 6 भाव में है। इस प्रकार लग्न का उप स्वामी 2 ,6 10 और 11 का सूचक है। इसलिए जातक के प्रयास जाब के मामले में सफल होंगे।

नौकरी मिलने का सूत्रः नक्षत्र चिंतामणि के पेज 133 पर श्री चिंतामणि आर भट्ट ने लिखा है कि यदि 6 व 10 कस्प का उप स्वामी 2 ,6 या 10 भाव का सूचक है तो नौकरी या आमदनी इन भावों के संयुक्त दशा समय में अवश्य होगी।

इस मामले में 6 कस्प उप स्वामी शनि छठे का स्वामी है। शनि के नक्षत्र में कोई ग्रह नहीं है, लिहाजा यह मजबूत स्थिति में है। शनि का नक्षत्र स्वामी चंद्र 11 का स्वामी है और इसका उप शनि 6 का स्वामी है। इस प्रकार 6 कस्प का उप स्वामी 6 और 11 का सूचक है, जो अवश्य नौकरी दिलाएगा।

10 कस्प का उप स्वामी गुरु 6 भाव में है और 4 एवं 7 का स्वामी है। यह गुरु के नक्षत्र और मंगल के उप में है। मंगल 2 भाव में है एवं 3 और 8 का स्वामी है। इस प्रकार 10 कस्प का उप स्वामी 6, 2 व 4 का सूचक है। यह दर्शा रहा है कि नौकरी उसके गृह नगर में ही लगेगी।

2 कस्प का उप स्वामी राहु 4 भाव में है। राहु, गुरु की राशि में है, जो 6 भाव में बैठा है और 4 व 7 का स्वामी है। राहु का नक्षत्र स्वामी केतु 10 भाव में बैठा है। केतु का उप शनि है जो 6 भाव का स्वामी है। इस प्रकार 2 कस्प का उप स्वामी 2,6,10 और 4 का सूचक है, जो नौकरी मिलने का संकेत कर रहा है।

शासक ग्रह 23-10-2010 को दोपहर 1:40 बजे चंडीगढ़

लग्न स्वामी: शनि, लग्न नक्षत्र स्वामी: चंद्र
चंद्र स्वामी: मंगल; चंद्र नक्षत्र स्वामी: केतु
वार स्वामी: शनि

महादशा, भुक्ति एवं अंतर दशा का विश्लेषण-होररी कुंडली देखने के समय केतु महादशा में गुरु की भुक्ति 17-1-2010 से 24-12-2010 तक थी। अगली भुक्ति शनि की 24-12-2010 से 1-2-2011 तक थी। केतु महादशा को देखें तो केतु 10 वे भाव में बुध की राशि में है और दो भाव में है।

यह 10 वे भाव का स्वामी है। यह राहु के नक्षत्र में है और राहु 4 भाव में है। यह शनि के उप में है जो 6 भाव का स्वामी है। लिहाजा केतु महादशा 2,6 और 10 भावों की सूचक है, केतु महादशा जाब मिलने की सूचना दे रही है, क्योंकि केतु हमारे शासक ग्रहों में शामिल है।

भुक्ति दशा गुरु की है, गुरु हमारे शासक ग्रहों में नहीं है। लिहाजा इससे आगे देखते हैं। अगली भुक्ति दशा शनि की है, जो (24-12-2010 से 1-02-2012) तक चलेगी। शनि 6 भाव का स्वामी है और उसके नक्षत्र में कोई ग्रह नहीं है, यह मजबूत स्थिति में है और 6 भाव का मजबूत कारक है। इस तरह शनि 6 और 11 भाव का सूचक होकर जाब लगने का सूचक है, क्योंकि यह हमारे शासक ग्रहों में भी है।

अंतरदशा देखें तो शनि भुक्ति में पहली अंतरदशा शनि की (24-12-2010 से 26-02-2011) तक चलेगी। अतः यह स्पष्ट है कि जातक की सर्विस इसी समय में लगेगी।

वास्तविकताः फरवरी 2011 में इस महिला जातक की सर्विस उसके गृह नगर दिल्ली में ही लग गयी। मेरा गुरुजी श्री केएस कृष्णमूर्ति जी और श्री चंद्रकांत आर भट्ट जी को शत-शत प्रणाम।

लेखक-वीके शर्मा