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लक्ष्मी प्राप्ति के लिए क्या करें, क्या न करें

धन कमाने के रास्ते हर कोई तलाश रहा है, पर रास्ते भी भाग्य से मिलते हैं। भाग्य साथ न दे रहा हो तो हमारे शास्त्रों में ऐसे तमाम उपाय दिए हैं, जिन्हें हम आजमाएं तो भाग्य खुल भी जाता है, अन्यथा तात्कालिक जरूरत तो पूरी हो ही जाती है। यहां कुछ सरल उपाय दिए जा रहे हैं, जिनमें से कोई भी उपाय आप आसानी से कर सकते हैं।

एक-इस सरल प्रयोग को पूर्ण पवित्रता से करने पर लाभ अवश्य मिलता है। लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती है। धन की वर्षा होती है। रूका पैसा तो मिलता ही है, आय के नए-नए साधन भी जुटने लगते हैं। सबसे पहले पूरी शुद्धता से नीचे दिए गए मंत्र की पहले 108 बार माला करें।

महालक्ष्मी मंत्र

‘ॐ श्रीं ह्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्मयै नम:’

अब चांदी की एक छोटी-सी डिबिया लें। अगर चांदी की उपलब्ध नहीं हो तो किसी और शुद्ध धातु की डिबिया भी आप ले सकते हैं। इस डिबिया को ऊपर तक नागकेशर तथा शहद से भरकर बंद कर दें। दीपावली की रात्रि को इसका पूजन-अर्चन करके इसे अपने लॉकर या दुकान के गल्ले में रख दीजिए। रखने के बाद इसे खोलने की जरूरत नहीं है और ना ही और कुछ उपाय करने की। फिर अगली दीपावली तक इसे लॉकर या गल्ले में रखी रहने दें। दिनों दिन बढ़ती लक्ष्मी का चमत्कार स्वयं दिखने लगेगा।


अगर कारोबार में नुकसान हो रहा हो तो रवि-पुष्प योग के दिन श्रद्धापूर्वक अमलतास के वृक्ष का पूजन करें। तीन-आर्थिक संपन्नता के लिए किसी भी माह के शुक्ल पक्ष को यह प्रयोग आरंभ करें और नियमित 3 शुक्रवार को यह उपाय करें।


मंत्र: ॐ श्रीं श्रीये नम:। इस मंत्र का मात्र 108 बार जप करें। तत्पश्चात 7 वर्ष की आयु से कम की कन्याओं को श्रद्धापूर्वक भोजन कराएं। भोजन में खीर और मिश्री जरूर खिलाएं। ऐसा करने से मां लक्ष्मी अवश्य प्रसन्न होगीं। आर्थिक परेशानी खत्म होगी।


जब भी कोई रत्न पूजन करके धारण करें, उसी समय उस रत्न से संबंधित सामग्री का दान करना चाहिए। दिवाली वाले दिन ऐसा जरूर करें।


ॐ महालक्ष्म्यै नम:। दिवाली से शुरू करके रोज़ाना 51 माला 40 दिन तक इस मंत्र का जाप करें। आपकी गरीबी दूर होने लगेगी।


ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्म्यै नम:। इस मंत्र की 108 माला संभव हो तो दिवाली के दिन करें अन्यथा धनतेरस से शुरू करके दिवाली तक पूरी कर दें। इसके बाद नित्य 2 माला जप करें। आप स्वयं अनुभव करेंगे कि जीवन में सुगमता और सरलता के साथ धन आने लगा है।


धनतेरस की सायं से शुरू करके 51 माला रोज़ाना इन मंत्रों का क्रमवार जप करें और असर देखें। मंत्र हैं-ॐ आधलक्ष्म्यै नम:। ॐ विद्यालक्ष्म्यै नम:। ॐ सौभाग्यलक्ष्म्यै नम:। ॐ अमृतक्ष्म्यै नम:। ॐ कामलक्ष्म्यै नम:। ॐ सत्यलक्ष्म्यै नम:। ॐ भोगलक्ष्म्यै नम:। ॐ योगलक्ष्म्यै नम:।


ॐ महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णु पत्न्ये(यै) च धीमही तन्नो लक्ष्मी: प्रचोदयात। दिवाली से शुरू करके नित्य 11 माला 40 दिन तक करें और उद्यापन कर दें। यह चमत्कारिक रूप से लाभ देगा।


ॐ नमो धनदायै स्वाहा। दिवाली से शुरू करें और 21 माला रोज़ाना 40 दिन तक कर लें। तत्पश्चात हवन एवं उद्यापन कर दें। अवश्य लाभ होगा।


दिवाली के दिन सुबह गाय को आटे की पांच लोई सीधे हाथ से खिलायें और उसकी लार जो हथेली पर लगे, उसे अपने सिर से पौंछ लें। सायं घर के आसपास के मंदिर में घी के दीपक जलाएं और दिवाली पूजन के समय श्रीं श्रीं श्रीं मन में जपते रहें। रात को गोपाल सहस्रनाम का पाठ अवश्य करें अथवा कराएं।


लक्ष्मी प्राप्ति के लिए क्या न करें

दोनों हाथों से सिर नही खुजलाना चाहिए, अपने हाथों से शरीर के किसी अंग को नही बजाना चाहिए, पैर पर पैर रखकर नही बैठें, पैरों को नही हिलाएं,मिट्टी के ढ़ेलों को नही फोड़े, देवताओं एवं वरिष्ठों के सामने थूकना, पैर से आसन खिंचकर नही बैठे ऐसा करने से लक्ष्मी का नाश होता है।

कण-कण एवं पल-पल का मोल- विद्या पाने की चाह रखने वालों को पल का एवं धन की इच्छा रखने वाले को कण को भी व्यर्थ नही करना चाहिए। बल्कि पल-पल विद्या अभ्यास करते रहना चाहिए और धन की इच्छा वालों को कण-कण धन का संग्रह करना चाहिए।

सर्वमतानुसार महालक्ष्मी पूजन से घर-परिवार में वैभव की प्रतिष्ठा की जा सकती है। प्रातःकाल स्नान, तुलसी सेवन, उद्यापन और दीपदान का उत्तम अवसर कहा गया है –

‘हरिजागरणं प्रातः स्नानं तुलसीसेवनम्। उद्यापनं दीपदानं व्रतान्येतानि कार्तिके॥’

इन उपायों से सत्यभामा ने अक्षय सुख, सौभाग्य और संपदा के साथ सर्वेश्वर को सुलभ किया था। यदि इस अवधि में लक्ष्मी मंत्र की माला की जाए तो वैभव प्राप्त होता है। वास्तु ग्रंथों में लक्ष्मी, यश-कीर्ति की प्राप्ति और अलक्ष्मी के नाश के उपाय के रूप में कई उपाय मिलते हैं। लक्ष्मी, गायत्री मंत्र का निरंतर जाप भी इष्टप्रद है।

‘महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णुपत्न्यै च धीमहि तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात्।’

गृहस्थ को हमेशा कमलासन पर विराजित लक्ष्मी की पूजा करनी चाहिए। देवीभागवत में कहा गया है कि कमलासना लक्ष्मी की आराधना से इंद्र ने देवाधिराज होने का गौरव प्राप्त किया था। इंद्र ने लक्ष्मी की आराधना ‘कमलवासिन्यै नमः’ मंत्र से की थी। यह मंत्र आज भी अचूक है।

दीपावली को अपने घर के ईशान कोण में कमलासन पर मिट्टी या चांदी की लक्ष्मी की प्रतिमा को विराजित कर, श्रीयंत्र के साथ यदि उक्त मंत्र से पूजन किया जाए और निरंतर जाप किया जाए तो चंचला लक्ष्मी स्थिर होती है। बचत आरंभ होती है और पदोन्नति मिलती है। साधक को अपने सिर पर बिल्व पत्र रखकर पंद्रह श्लोकों वाले श्रीसूक्त का जाप भी करना चाहिए।

दीपावली की रात देवी लक्ष्मी के साथ एकदंत मंगलमूर्ति गणपति की पूजा की जाती है। पूजास्थल पर गणेश-लक्ष्मी की मूर्ति या तस्वीर के पीछे शुभ और लाभ लिखा जाता है व इनके बीच में स्वस्तिक का चिन्ह बनाया जाता है।

लक्ष्मी जी की पूजा से पहले भगवान गणेश की फूल, अक्षत, कुंकू, रोली, दूब, पान, सुपारी और मोदक मिष्ठान से पूजा की जाती है फिर देवी लक्ष्मी की पूजा भी इस प्रकार की जाती है। देवी लक्ष्मी इस रात अपनी बहन दरिद्रा के साथ भू-लोक की सैर पर आती हैं। जिस घर में साफ-सफाई और स्वच्छता रहती है, वहाँ माँ लक्ष्मी अपने कदम रखती हैं और जिस घर में ऐसा नहीं होता वहां दरिद्रा अपना डेरा जमा लेती है।

यहां एक और बात ध्यान देने योग्य है कि देवी सीता जो लक्ष्मी की अवतार मानी जाती हैं वह भी भगवान श्रीराम के साथ इस दिन वनवास से लौट कर आईं थी। इसलिए भी इस दिन घर की साफ-सफाई करके देवी लक्ष्मी का स्वागत व पूजन किया जाता है।

घर में मां, दादी जो कोई बड़ी होती हैं वे रात्रि के अंतिम प्रहर में देवी लक्ष्मी का आह्वान करती हैं और दरिद्रा को बाहर करती हैं। इसके लिए कहीं-कहीं सूप को सरकंडे से पीटा जाता है तो कहीं पुराने छाज में कूड़े आदि भर कर घर से बाहर कहीं फेंका जाता है। इस क्रम में महिलाएं यह बोलती हैं- ‘अन्न, धन, लक्ष्मी घर में पधारो, दरिद्रा घर से भागो भागो।’

व्यावसायियों के लिए नए वर्ष का आगमन होता है वे इस दिन पूरे बहीखाते का हिसाब करते हैं और नया बहीखाता लिखते हैं, तंत्र साधना करने वालो के लिए यह रात सिद्धि देने वाली होती है, इस रात भूत, प्रेत, बेताल, पिशाच, डाकनी, शाकनी आदि उन्मुक्त रूप से विचरण करते हैं ऐसे में जो साधक सिद्धि चाहते हैं उन्हें आसानी से फल की प्राप्ति होती है।

पैसा कमाना है तो लक्ष्मी को मनाएं

प्रत्येक दिन नित्य क्रम से स्नानोंपरांत अपने घर के पूजा स्थान में घी का दीपक जलाकर मां लक्ष्मी को मिश्री और खीर का भोग लगाएं। हर शुक्रवार लाल या सफेद परिधान पहनें। हाथ में चांदी की अंगूठी या छल्ला धारण कर उसी समय चावल और शकर का किसी योग्य ब्राह्मण को दान करें। इससे रत्न संबंधी ग्रह की शुभता बढ़ती है।