श्रीमहालक्ष्मी पूजन Mahalakshmi Pujan (for deepawali)

दीपावली है आज। प्रकाश और मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने का दिन। आज आपको उनका पूजन करना है। इसके लिए पंडित से पहले ही मुहूर्त पूछ लें और उससे पहले निम्न सामग्री का इंतजाम कर लें, ताकि पूजन करते समय कोई सामग्री छूट न जाए। तो आपको ये सामान एकत्र करना है।

पूजन सामग्री-कच्चा दूध, दही, घी (देशी गाय का हो तो अति उत्तम), शहद, गंगाजल, आम्रपत्र, बिल्व पत्र, दुर्वा, फूल, फल, लोटा, थाली, शंख, घंटी, पीला चावल, शुध्द जल, श्री यन्त्र, कुबेर यन्त्र, महालक्ष्मी यन्त्र, महाकाली का चित्र, हल्दी गांठ-9, पूजा सुपारी-11, जनेऊ-4, सिन्दुर, गुलाल, मौली धागा, इत्र (गुलाब,चन्दन,मोगरा), कमल का फूल-3, कमल गट्टा, रितुफल, नारियल-4, मिष्ठान,

ताम्बुल (पान पत्ता), चन्दन, बंदन, धान का लावा और तिल का तेल/सरसों के तैल।

इन सामग्री की व्यवस्था करके पश्चिम या उत्तर की ओर मुख करके पूजन प्रारंभ करें।

पूजन विधि-सर्वप्रथम पवित्री करण करें। लोटे में जल लेकर उसमें थोड़ा सा गंगा जल मिलाकर अपने ऊपर छिडकें तथा ये भावना करें कि हम पवित्र हो रहे हैं।

पूजा घर के सम्मुख चौकी बिछाकर उस पर लाल वस्त्र बिछाकर लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति या चित्र स्थापित करें तथा चित्र को पुष्पमाला पहनाएं। मूर्तिमयी श्रीमहालक्ष्मीजी के पास ही किसी पवित्र पात्र में केसर युक्त चन्दन से अष्ट दल कमल बनाकर उस पर द्रव्य लक्ष्मी-(रुपयों) को भी स्थापित करके एक साथ ही दोनों की पूजा करनी चाहिये। पूजन सामग्री को यथा स्थान रख लें।

इसके पश्चात धूप, अगरबती और 5 दीपक शुध्द घी के और अन्य दीप तिल का तेल/सरसों के तेल से प्रज्वलित करें। जल से भरा कलश भी चौकी पर रखें। कलश में मौली बांधकर रोली से स्वास्तिक का चिन्ह अंकित करें।

तत्पश्चात श्री गणेश जी को, फिर उसके बाद लक्ष्मी जी को तिलक करें और पुष्प अर्पित करें। इसके पश्चात हाथ में पुष्प, अक्षत, सुपारी, सिक्का और जल लेकर संकल्प करें। संकल्प इस तरह लेना है।

संकल्प- मैं (अपना नाम बोलें), सुपुत्र श्री (पिता का नाम बोलें), गोत्र (गोत्र बोलें), पता (अपना पूरा पता बोलें) अपने परिजनो के साथ जीवन को समृध्दि से परिपूर्ण करने वाली माता महालक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने के लिये कार्तिक कृष्ण पक्ष की अमावस्या के दिन महालक्ष्मी पूजन कर रहा हूं।

हे मां, कृपया मुझे धन, समृध्दि और ऐश्वर्य देने की कृपा करें। मेरे इस पूजन में स्थान देवता, नगर देवता, इष्ट देवता कुल देवता और गुरु देवता सहायक हों तथा मुझें सफलता प्रदान करें।

यह संकल्प पढ़कर हाथ में लिया हुआ जल, पुष्प और अक्षत आदि श्री गणेश-लक्ष्मी के समीप छोड दें।
इसके बाद एक-एक कर के गणेशजी, मां लक्ष्मी, मां सरस्वती, (बैंक की पास बुक/रजिस्टर/बहीखाता), मां काली (कलम), धनाधीश

कुबेर (तिजोरी/गल्ला), तुला मान की पूजा करें। यथा शक्ति भेंट, नैवैद्य, मुद्रा आदि अर्पित करें।

दीपमालिका पूजन-किसी पात्र में 11, 21 या उससे अधिक दीपों को प्रज्वलित कर महालक्ष्मी के समीप रखकर उस दीप-ज्योति का “ओम दीपावल्यै नमः” इस नाम मंत्र से गन्धादि उपचारों द्वारा पूजन कर इस प्रकार प्रार्थना करें-

त्वं ज्योतिस्तवं रविश्चन्दरो विधुदग्निश्च तारकाः।
सर्वेषां ज्योतिषां ज्योतिर्दीपावल्यै नमो नमः।।

दीपमालिकाओं का पूजन कर संतरा, ईख, पानीफल, धान का लावा इत्यादि पदार्थ चढायें। धानका लावा (खील) गणेश, महा लक्ष्मी तथा अन्य सभी देवी देवताओं को भी अर्पित करें। अन्त में अन्य सभी दीपकों को प्रज्वलित कर सम्पूर्ण गृह को अलंकृत करें। इसके बाद हवन करें। हवन में कमलगट्टे या कमल के फूल को शुद्ध घी में डुबोकर निम्न एक-एक मंत्र पढ़कर आहूति दें।

हवन विधि

श्री सुक्त-लक्ष्मी सूक्त
!!श्री गणेशाय नमः!!
हिरण्यवर्णां हरिणीं सुवर्णरजतस्रजाम्।
चन्द्रां हिरण्मयीं लक्ष्मीं जातवेदो मा आ वह।। ओम महालक्ष्म्ये स्वाहा।।

तां म आ वह जातवेदो लक्ष्मीमनपगामिनीम्।
यस्यां हिरण्यं विन्देयं गामश्वं पुरुषानहम्।। ओम महालक्ष्म्ये स्वाहा।।

अश्वपूर्वां रथमध्यां हस्तिनादप्रमोदिनीम्
श्रियं देवीमुपह्वये श्रीर्मा देवी जुषताम्।। ओम महालक्ष्म्ये स्वाहा।।

कांसोस्मितां हिरण्यप्राकारामार्द्रां ज्वलन्तीं तृप्तां तर्पयन्तीम्।
पद्मेस्थितां पद्मवर्णां तामिहोपह्वये श्रियम्।। ओम महालक्ष्म्ये स्वाहा।।

चन्द्रां प्रभासां यशसा ज्वलंतीं श्रियं लोके देवजुष्टामुदाराम्।
तां पद्मिनीमीं शरणमहं प्रपद्येऽलक्ष्मीर्मे नश्यतां त्वां वृणोमी।। ओम महालक्ष्म्ये स्वाहा।।

आदित्यवर्णे तपसोऽधिजातो वनस्पतिस्तव वृक्षोऽथ बिल्वः।
तस्य फलानि तपसानुदन्तुमायान्तरायाश्च बाह्या अलक्ष्मीः।। ओम महालक्ष्म्ये स्वाहा।।

उपैतु मां देवसखः कीर्तिश्च मणिना सह।
प्रादुर्भूतोऽस्मि राष्ट्रेस्मिन्कीर्तिमृद्धिं ददातु मे।। ओम महालक्ष्म्ये स्वाहा।।

क्षुत्पिपासामलां ज्येष्ठामअलक्ष्मीं नाशयाम्यहम्।
अभूतिमसमृद्धिं च सर्वां निर्णुदमे गृहात्।। ओम महालक्ष्म्ये स्वाहा।।

गन्धद्वारां दुराधर्षां नित्यपुष्टां करीषिणीम्।
ईश्वरीं सर्वभूतानां तामिहोपह्वये श्रियम्।। ओम महालक्ष्म्ये नमः।।

मनसः काममाकूतिं वाचः सत्यमशीमहि।
पशूनां रूपमन्नस्य मयि श्रीः श्रयतां यशः।। ओम महालक्ष्म्ये नमः।।

कर्दमेन प्रजाभूतामयि सम्भवकर्दम।
श्रियं वासय मे कुले मातरं पद्ममालिनीम्।। ओम महालक्ष्म्ये नमः।।

आपः सृजन्तु स्निग्धानि चिक्लीतवसमे गृहे।
निचदेवीं मातरं श्रियं वासय मे कुले।। ओम महालक्ष्म्ये नमः।।

आर्द्रां पुष्करिणीं पुष्टिं सुवर्णां हेममालिनीम्।
सूर्यां हिरण्मयीं लक्ष्मीं जातवेदो म आवह।। ओम महालक्ष्म्ये नमः।।

आर्द्रां यःकरिणीं यष्टिं पिङ्गलां पद्ममालिनीम्।
चन्द्रां हिरण्मयीं लक्ष्मीं जातवेदो म आवह।। ओम महालक्ष्म्ये स्वाहा।।

तां म आवह जातवेदो लक्ष्मीमनपगामिनीम्।
यस्यां हिरण्यं प्रभूतं गावोदास्योश्वान्विन्देयं पुरुषानहम्।। ओम महालक्ष्म्ये स्वाहा।।

यः शुचिः प्रयतो भूत्वा जुहुयादाज्यमन्वहम्।
सूक्तं पञ्चदशर्चं च श्रीकामः सततं जपेत्।। ओम महालक्ष्म्ये स्वाहा।।

पद्मानने पद्म ऊरू पद्माक्षी पद्मसम्भवे।
तन्मेभजसि पद्माक्षी येन सौख्यं लभाम्यहम्।। ओम महालक्ष्म्ये स्वाहा।।

अश्वदायी गोदायी धनदायी महाधने।
धनं मे जुषतां देवि सर्वकामांश्च देहि मे।। ओम महालक्ष्म्ये स्वाहा।।

पद्मानने पद्मविपद्मपत्रे पद्मप्रिये पद्मदलायताक्षि।
विश्वप्रिये विश्वमनोनुकूले त्वत्पादपद्मं मयि संनिधत्स्व।। ओम महालक्ष्म्ये स्वाहा।।

पुत्रपौत्रं धनं धान्यं हस्त्यश्वादिगवेरथम्।
प्रजानां भवसि माता आयुष्मन्तं करोतु मे।। ओम महालक्ष्म्ये स्वाहा।।

धनमग्निर्धनं वायुर्धनं सूर्यो धनं वसुः।
धनमिन्द्रो बृहस्पतिर्वरुणं धनमस्तु ते।। ओम महालक्ष्म्ये स्वाहा।।

वैनतेय सोमं पिब सोमं पिबतु वृत्रहा।
सोमं धनस्य सोमिनो मह्यं ददातु सोमिनः।। ओम महालक्ष्म्ये स्वाहा।।

न क्रोधो न च मात्सर्यं न लोभो नाशुभा मतिः।
भवन्ति कृतपुण्यानां भक्तानां श्रीसूक्तं जपेत्।। ओम महालक्ष्म्ये स्वाहा।।

सरसिजनिलये सरोजहस्ते धवलतरांशुकगन्धमाल्यशोभे।
भगवति हरिवल्लभे मनोज्ञे त्रिभुवनभूतिकरि प्रसीद मह्यम्।। ओम महालक्ष्म्ये स्वाहा।।

विष्णुपत्नीं क्षमादेवीं माधवीं माधवप्रियाम्।
लक्ष्मीं प्रियसखीं देवीं नमाम्यच्युतवल्लभाम्।। ओम महालक्ष्म्ये स्वाहा।।

महालक्ष्मी च विद्महे विष्णुपत्नी च धीमहि तन्नो लक्ष्मीः प्रचोदयात्।। ओम महालक्ष्म्ये स्वाहा।।

श्रीवर्चस्वमायुष्यमारोग्यमाविधाच्छोभमानं महीयते।
धान्यं धनं पशुं बहुपुत्रलाभं शतसंवत्सरं दीर्घमायुः।। ओम महालक्ष्म्ये स्वाहा।।
इस तरह हवन पूरा करके प्रसाद लगाएं और अब आरती करें।

आरती एवं पुष्पांजलि

गणेश, लक्ष्मी और भगवान जगदीश्वर की आरती करें। उसके बाद पुष्पान्जलि अर्पित करें, क्षमा प्रार्थना करें।
विसर्जन-पूजन के अन्तमें हाथ में अक्षत लेकर नूतन गणेश एवं महालक्ष्मी की प्रतिमा को छोड़कर अन्य सभी आवाहित, प्रतिष्ठित एवं पूजित

देवताओं को अक्षत छोड़ते हुए निम्न मंत्र से विसर्जित करें-
यान्तु देवगणाः सर्वे पूजमादाया मामकीम्।
इष्टकामसमृध्दयर्थं पुनरागमनाया च।।

टीपः-मंदिर, तुलसी माता, पीपल आदि के पास दीपक जलाना नहीं भूलना। लक्ष्मी पूजा में तिल के तेल का उपयोग ही श्रेष्ठ होता है। अभाव में सरसों का इस्तमाल कर सकते हैं।

पंडित-भास्कर शास्त्री