Category: Tantra

दुर्गास्तुति: durgastuti

श्रीमहाभागवत पुराण के अन्तर्गत वेदों द्वारा की गई दुर्गा स्तुति श्रुतय ऊचु: दुर्गे विश्वमपि प्रसीद परमे सृष्ट्यादिकार्यत्रये ब्रह्माद्या: पुरुषास्त्रयो निजगुणैस्त्वत्स्वेच्छया कल्पिता: । नो ते कोsपि च कल्पकोsत्र भुवने विद्येत...

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श्रीगणेशद्वादशनामस्तोत्रम

श्रीगणेशद्वादशनामस्तोत्रम सुमुखश्चैकदन्तश्च कपिलो गजकर्णक: । लम्बोदरश्च विकटो विघ्ननाशो विनायक: ।।1।। धूम्रकेतुर्गणाध्यक्षो भालचन्द्रो गजानन: । द्वादशैतानि नामानि य: पठेच्छृणुयादपि ।।2।। विद्यारम्भे विवाहे च प्रवेशे निर्गमे तथा...

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गायत्री स्तोत्रम Gayatri strotam

महेश्वर उवाच जयस्व देवि गायत्रि महामाये महाप्रभे । महादेवि महाभागे महासत्त्वे महोत्सवे ।।1।। दिव्यगन्धानुलिप्ताड़्गि दिव्यस्त्रग्दामभूषिते । वेदमातर्नमस्तुभ्यं त्र्यक्षरस्थे महेश्वरि ।।2।। त्रिलोकस्थे त्रितत्वस्थे त्रिवह्निस्थे...

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ग्रह, उनके मंत्र और जाप संख्या

हर ग्रह का अपना एक मंत्र हैं और मंत्रों का जाप कितनी संख्या में करना चाहिए यह भी हर ग्रह के लिए अलग है अर्थात हर ग्रह की जप संख्या अलग होती है. ग्रह का मंत्र और उनकी जप संख्या को तालिका द्वारा दर्शाया गया है. जब किसी ग्रह की...

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ललितापंचकम् Lalita Panchkam

ललितापंचकम् प्रात: स्मरामि ललितावदनारविन्दं विम्बाधरं पृथुलमौक्तिकशोभिनासम् । आकर्णदीर्घनयनं मणिकुण्डलाढ़्यं मन्दस्मितं मृगमदोज्ज्वलभालदेशम् ।।1।। प्रातर्भजामि ललिताभुजकल्पवल्लीं रक्तांगुलीयलसदंगुलिपल्लवाढ़्याम् ।...

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शिवसहस्त्रनाम स्तोत्रम Shiv Sahatra naam Strotam

शिवसहस्त्रनाम स्तोत्रम Shiv Sahatra naam Strotam शुक्लाम्बरधरं विष्णुं शशिवर्णं चतुर्भुजम्। प्रसन्नवदनं ध्यायेत् सर्वविघ्नोपशान्तये॥ नमोऽस्तु ते व्यास विशालबुद्धे फुल्लारविन्दायतपत्रनेत्र। येन त्वया भारततैलपूर्णः प्रज्वालितो...

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श्रीदुर्गाष्टोत्तरशत नामस्तोत्रम

ईश्वर उवाच शतनाम प्रवक्ष्यामि श्रृणुष्व कमलानने । यस्य प्रसादमात्रेण दुर्गा प्रीता भवेत सती ।।1।। ऊँ सती साध्वी भवप्रीता भवानी भवमोचनी । आर्या दुर्गा जया चाद्या त्रिनेत्रा शूलधारिणी ।।2।। पिनाकधारिणी चित्रा चण्डघण्टा महातपा: ।...

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