पिछली पोस्‍ट में आपने पढ़ा था कि मधुमेह (Diabetes) रोग क्‍या है और इसे ज्‍योतिषीय दृष्टिकोण से कैसे देखेंगे। अब ग्रंथों में दिए गए योगों के बारे में इस पोस्‍ट में बताया जा रहा है। पत्रवाचन की तीसरी और अंतिम कड़ी में सामान्‍य योगों पर चर्चा करेंगे…

– अगर सूर्य, चंद्रमा, बुध और शुक्र पांचवे भाव में हो तो मधुमेह होता है। अगर एक, दो या तीन ग्रह भी पांचवें भाव में हो तो मधुमेह होने की आशंका बढ़ जाती है। अगर ये ग्रह खराब ग्रहों के साथ युति बनाते हैं तो रोग के बारे में स्‍पष्‍टता से कहा जा सकता है। ऐसा देखा गया है कि पांचवे भाव का शुक्र शनि से पीडि़त हो तो जातक को मधुमेह होता ही है।

– अगर लग्‍न में शनि के साथ सूर्य अथवा मंगल हो तो जातक को मधुमेह रोग होता है। अगर तीनों लग्‍न में हों तो परिणाम अधिक तेजी से प्रकट होते हैं। केवल मंगल और शनि भी हों तो रोग उभरकर सामने आ जाता है।

– अगर शनि आठवें भाव में पीडि़त हो तो लंबे समय तक चलने वाले रोग होते हैं। कई बार यही रोग मृत्‍यु का कारण भी बनते हैं।

– अगर शुक्र लग्‍न और वर्ग कुण्‍डलियों में जलतत्‍वीय राशि में हो तो शुक्र के कमजोर होने के बावजूद परिणाम तेजी से मिलते हैं।

– अगर शनि और मंगल की युति हो अथवा एक-दूसरे को दृष्टिसंबंध से प्रभावित कर रहे हों तो मधुमेह होता है। करीब साठ प्रतिशत मामलों में शनि और मंगल की युति मधुमेह रोग पैदा करती है।

– अगर लग्‍न पीडि़त हो, लग्‍नाधिपति नीच का हो और आठवें भाव में शुक्र हो या शुक्र से प्रभावित हो तो मधुमेह होने की आशंका बढ़ जाती है। (इसके बहुत अधिक परिणाम देखने में नहीं आए हैं)

– अगर बुध धनु या मीन राशि में हो और सूर्य की युति हो तो मधुमेह होने की आशंका बढ़ जाती है।

– अगर लग्‍न में सूर्य और सातवें भाव में मंगल हो तो मधुमेह रोग होता है। इसमें यह तथ्‍य भी शामिल है कि अगर वर्ग जलतत्‍वीय राशियों में हो तो ही रोग होने की आशंका बढ़ती है।

– अगर आठवें भाव को मंगल प्रभावित करे तो मधुमेह रोग होने की आशंका अधिक होती है। मधुमेह के कई रोगियों में ऐसा देखा गया है।

– आठवें भाव में बुध से मूत्र संबंधी रोग होते हैं। अगर वर्गों में बुध जलतत्‍वीय राशियों में हो और पीडि़त हो तो परिणाम अधिक तेजी से आते हैं।

– अगर लग्‍नाधिपति छठे भाव में मंगल के साथ हो तो जातक को मधुमेह रोग होता है। इस स्थिति में हकीकत में भोजन की नियमितता प्रभावित होती है। इसका परिणाम हाइपर एसिडिटी अल्‍सर के रूप में सामने आता है। चूंकि छठा भाव प्रभावित हो रहा है, अत: मधुमेह भी हो सकता है।

– अगर नवमांश में चंद्रमा कर्क अथवा वृश्चिक राशि में हो और चंद्रमा पीडि़त हो तो इसी प्रकार का रोग होने की आशंका बढ़ जाती है। वृहत्जातक में कहा गया है कि

‘‘चंद्रे कर्कटवृश्चिकांशकगते पार्पेर्युते गुह्यरुक्’’

यहां गुह्यरुक का अर्थ है कि ऐसा रोग जो गुप्‍तांगों के साथ या छिपा हुआ हो। इसका आशय वर्गों में चंद्रमा की स्थिति को लेकर भी लगाया जाता है। अगर चंद्रमा सिंह राशि में हो तो प्‍यास और भूख की मात्रा बढ़ जाती है, जो मधुमेह का लक्षण है। अगर सिंह राशि में कमजोर चंद्रमा हो तो भूख और प्‍यास के साथ कमजोर पाचन तंत्र भी होता है। अगर चंद्रमा वर्गों में जलतत्‍वीय राशि में हो तो मधुमेह की आशंका बढ़ जाती है।

– अगर शुक्र और चंद्रमा जैसे ग्रह सातवें भाव में सप्‍तमेश के साथ हों तो मूत्र संबंधी रोग होते हैं।

– अगर छठे भाव का अधिपति तीसरे भाव में बैठा हो तो नाभि के करीब रोग होता है। यहां मूत्र संबंधी विकार मधुमेह के कारण भी हो सकते हैं।

– अगर पांचवे भाव में सूर्य, चंद्रमा और शुक्र हों तो मधुमेह रोग होता है। वर्गों में अगर जलतत्‍वीय राशियों की प्रमुखता हो तो इसके परिणाम अधिक तीव्रता के साथ आते हैं।

– सातवें भाव में राहू होने से कमर से संबंधित रोग उभरते हैं। राहू होने से रोग गुह्य होता है। ऐसे में मधुमेह की शंका की जा सकती है।

– पांचवे भाव में पीड़ादायी ग्रह मधुमेह रोग का कारण बन सकता है।

– सातवें भाव का अधिपति प्रतिकूल भाव में हो और पीडि़त हो तो मधुमेह होने की आशंका होती है।

– अगर लग्‍न शनि से प्रभावित हो और आठवें भाव का अधिपति पीडि़त हो तो अपच से समस्‍या की शुरूआत होती है।

तिरुवंनंतपुरम के मिहिर एस्‍ट्रोलॉजिक सेंटर में तीन सौ कुण्‍डलियों के विश्‍लेषण के बाद इन योगों को मधुमेह रोग के कारक के रूप में प्रमाणित किया गया है। मधुमेह के लिए अन्‍य महत्‍वपूर्ण कारक जो हमें देखने होंगे

लग्‍न : यह जातक की सामान्‍य प्रतिरोधक क्षमता के बारे में जानकारी देता है।
शुक्र : यह यकृत की क्रियाविधि की जानकारी देता है।
चंद्र : यह पेंक्रियाज ग्रंथि की क्रिया और रस के प्रवाह के बारे में बताता है।
गुरु : धमनियां, शिराएं, क्षरण और मधुमेह रोग इससे देखा जाता है।
कर्क राशि : पेंक्रियाज पर इसका अधिकार है, पारिवारिक इतिहास भी इसी से देखा जाएगा।
तुला राशि : किडनी और उत्‍सर्जन तंत्र पर इसका अधिकार है।
धनु राशि : धमनी प्रणाली देखेंगे।
छठा भाव : रोग का घर

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