भाग्य , ज्योतिष और इच्छा शक्ति (Free Will Astrology)

भाग्य , ज्योतिष और इच्छा शक्ति (Free will astrology) का  आपस में काफी रोचक संबंध है। कुछ लोग अपने भाग्‍य  को कोसते हुए ही अपना जीवन व्‍यतीत कर देते हैं। ये लोग न खुद की सहायता कर पाते हैं और न ही कोई दूसरा इनकी सहायता कर पाता है।

बाहरी सहायता लेने वाले लोगों में मुझे दो प्रकार के लोग दिखाई देते हैं। पहले वे हैं जो ज्‍योतिषी  की सहायता लेते हैं और उसी पर निर्भर हो जाते हैं। वास्‍तव में ये लोग भी कुछ निम्‍न श्रेणी के हैं।

मुझे सर्वाधिक प्रभावित करने वाले जातक वे जातक  लगे हैं जो शुरूआती तौर पर ज्‍योतिषी की सहायता लें और बाद में खुद संभल जाएं। एक ज्‍योतिषी के रूप में मैंने इन लोगों की कुछ खासियत नोट की है। सो आपसे भी साझा करना चाहूंगा। हालांकि इन जातकों के नाम और पहचान मैं आपसे शेयर नहीं कर सकता, लेकिन इन लोगों का जिंदगी के प्रति रवैया बताने का प्रयास करूंगा।

यहां बताए गए तीन उदाहरणों में हम देखते हैं कि जातक को उस दौर से गुजरना पड़ता है जो लिखा हुआ है। इसके बावजूद पहला जातक संकेतों को एक बार पकड़ लेने के बाद अपनी राह तेजी से बढ़ने लगता है तो दूसरा अच्‍छे समय का इंतजार करने का निर्णय करता है और तीसरा जातक संकेतों को भी दरकिनार कर समय को भोगता है। अगर इच्‍छा स्‍वातंत्रय है तो इन तीनों लोगों के बीच ही कहीं है। जो उसे निर्णय करने का मौका देती है.

करीब चार साल पहले एक जातक मुझसे संपर्क करता है। मुझे कुण्‍डली (kundali) देखने का आग्रह करता है। मैं प्राथमिक विश्‍लेषण कर उसे फीस के लिए कहता हूं। वह फीस जमा करा देता है। अब मैं जो विश्‍लेषण भेजता हूं। उसमें मैंने लिखा कि आप मूल रूप से प्रबंधन के व्‍यक्ति हैं। चूंकि अब तक आपका समय खराब चल रहा था। इस कारण आप अस्‍थाई कार्यों में व्‍यस्‍त थे। अब तक आपने प्रबंधन की कोई डिग्री नहीं ली है तो अब ले लें और इसी क्षेत्र में अपनी पहचान बनाएं।

यहां कहानी खत्‍म नहीं हो जाती। उसी जातक का जवाब आता है कि मुझे उसकी कुण्‍डली दोबारा देखनी चाहिए क्‍योंकि जातक महज बारहवीं कक्षा पास है और वर्तमान में साइकिल की दुकान करता है। आप कल्‍पना कर सकते हैं कि जातक के दो या तीन हजार किलोमीटर दूर एक ज्‍योतिषीय के रूप में मेल की रिप्‍लाई पढ़ते हुए मेरी क्‍या हालत हुई होगी।

चूंकि मुझे अपने विषय  पर भरोसा है, सो मैंने पुन: मेल लिखा कि अब तक आपका समय खराब ही था, सो अस्‍थाइ कार्य करते रहे हैं। अब यह दौर खत्‍म होगा। आप सुखद भविष्‍य की तैयारी करें।

करीब तीन महीने तक न तो जातक का कोई जवाब आया न मैं खुद पलटकर पूछने का समय निकाल पाया। एक खुशनुमा सुबह मुझे एक और मेल मिलती है जिसमें यह सूचना होती है कि उसी जातक ने एक बार और फीस जमा कराई है और किसी अन्‍य जातक के बारे में विश्‍लेषण का आग्रह किया है।

अब मैं भी उत्‍सुक था कि आखिर इस जातक के साथ क्‍या हुआ। मैंने नए जातक का विश्‍लेषण अटका दिया और पहले पूर्व जातक से ही पूछा कि तुम इन दिनों क्‍या कर रहे हो। तो जातक का जवाब कुछ इस तरह था…

मेरी मेल मिलने के बाद वह प्रबंधन (Management) के काम खोजने लगा। इसी दौरान उसे विदेश में एक स्‍थान पर किसी अमरीकी कंपनी में सुपरवाइजर के पद की जानकारी मिली। मित्रों की सहायता से वह कंपनी के काम के लिए एजेंट  के संपर्क में आया और विदेश चला गया। वहां उसे सुपरवाइजर की पोस्‍ट मिल गई थी और डॉलर में तनख्‍वाह पा रहा था।

कहानी यहां भी खत्‍म नहीं हो जाती। चूंकि ज्‍योतिषी का फलादेश था कि जातक मूल रूप से प्रबंधन का व्‍यक्ति है। सो जातक ने आगे की पढ़ाई का सिलसिला भी शुरू कर दिया। बारहवीं कक्षा तक पढ़ाई के बाद जिस व्‍यक्ति ने पढ़ाई से नाता तोड़ लिया था उसने करीब बारह साल बाद फिर से पढ़ने का क्रम शुरू किया।

अब तक वह स्‍नातक  हो चुका है। अब आगे वह जिस विकल्‍प में उलझा है वह यह है कि अब वह चार्टर्ड एकाउंटेंसी (CA) करे या मैनेजमेंट की पढ़ाई करे।”

आखिरी बार जब उससे बात हुई तब वह फिर चिंता में था, लेकिन अब उसकी चिंताएं वे चिंताएं नहीं थी जो वह पहली बार मेरे सामने लेकर आया था कि उसका घर ठीक प्रकार कैसे चले। इसके इतर अब वह आकाश छूने के लिए बेताब है।

एक ज्‍योतिषी के रूप में मैंने न तो उसे कोई उपचार बताया, न उसे यह बताया कि आगे किस प्रकार बढ़ना है। न कोई आशीर्वाद दिया, न पूजन कराया। बस एक संकेत दिया कि आगे का रास्‍ता किधर से खुल सकता है।

सात आठ साल तक मुफलिसी का दौर झेलने और साइकिल की दुकान में बैठे बैठे वह यह नहीं समझ पा रहा था कि आगे रास्‍ता क्‍या है। बस मेरी इतनी सी ही मदद के बाद उसने न कभी मदद के लिए पूछा न मैंने बताने में कोई उत्‍सुकता दिखाई। ऐसे जातक दिल खुश कर जाते हैं।

एक और उदाहरण के एक आईटी प्रोफेशनल (IT Professional) का। जब उसका मेल मेरे पास आया, तब वह अपने जीवन का सबसे खराब समय जी रहा था। मैंने कुण्‍डली विश्‍लेषण कर उसे बताया कि आने वाला कितना समय और खराब है। इसके साथ ही उपचार भी बता दिए। आईटी क्षेत्र में छह महीने ही सही और खराब होने के लिए पर्याप्‍त होते हैं। किसी को काम में लगा रहना है तो काम में लगे रहें, छह महीने तक आपके पास कोई काम नहीं है तो आपको बोरिया बिस्‍तर बांधना पड़ेगा।

मैंने उस जातक को कोशिश करते रहने और उपचार करने की सलाह दी। मुझे पता नहीं जातक के पास और अधिक विकल्‍प थे या नहीं, लेकिन जातक ने मेरी बात को अक्षरश: माना (जैसा कि वह खुद बता रहा है) और इंडस्ट्री में टिका रहा।

कहने को जातक का खराब समय दीर्ध अवधि का था, लेकिन उपचारों के चलते मानसिक संबल प्राप्त करने के बाद जातक टिका रहा और परिस्थितियों का डटकर मुकाबला करता रहा। कुछ माह पहले उसकी मेल मिली जिसने मुझे भी उत्साहित किया। अब वह आईटी की ही एक श्रेष्ठ कंपनी में अच्छी पोजीशन में है।

पहले वाले मामले की तुलना में इस मामले में मेरा दखल इतना भर ही अधिक रहा कि मैंने जातक को कुछ ज्योतिषीय उपचार भी बताए। लेकिन उपचार करना और विपरीत परिस्थितियों के बावजूद टिके रहना, यह उस जातक की खुद की क्षमता थी। उसके बिना वह टिक नहीं सकता था।

तीसरा उदाहरण इन दोनों उदाहरणों के विपरीत है। मेरा एक सफल जातक (ऐसा जातक जो मुझसे सलाह लेने और उपचार करने के बाद अच्छी स्थिति में आ गया था) मुझे किसी दूसरे जातक के घर लेकर गया। मैं भी इसलिए तैयार हो गया कि मेरे पास पहले से एक सफल उदाहरण था। अब उसके घर का वास्तु (Vastu) देखने के बाद मैंने जातक को कहा कि इस घर में वास्तु के इतने अधिक दोष हैं कि आप लोगों को बजाय इस घर को सुधारने के यह घर ही छोड़ देना चाहिए।

जातक का समय खराब चल रहा था, ऐसे में मेरी सलाह के प्रति भी असावधान ही रहा। न उसने घर बदला न जिस घर में रह रहा था, उसमें किसी प्रकार का सुधार किया। कुछ समय पहले एक दिन शाम के समय वह मेरे चेम्‍बर में आया। तो उसके चेहरे का एक भाग कुछ विकृत हो रहा था। मैं बुरी तरह चौंका। उसने बताया कि कुछ दिन पहले पक्षाघात (Paralysis) का आक्रमण हुआ था। इससे चेहरा पूरी तरह विकृत हो गया था। इसके बाद तीन महीने इलाज चला और अब काफी ठीक है।

इस दुर्घटना से पहले वह केवल आर्थिक  रूप से परेशान था, लेकिन अब वह शारीरिक  रूप से भी समस्‍या में आ रहा था। अब उसने दोबारा उपचार पूछे। मैंने पिछली बात ही दोहराई। वह चला गया। कुछ दिन पहले उसने नया घर खरीद लिया है और मेरे बताए उपचार (Remedy) भी गंभीरता से कर रहा है।

अब देखते हैं कब और कितना सुधार हो पाता है। इस घटना ने मुझे एक बार फिर याद दिला दिया कि चाहे मैं किसी जातक को सावधान भी कर दूं तो फर्क नहीं पड़ेगा, अगर उसके भाग्‍य में आर्थिक और उसके बाद शारीरिक पीड़ा भोगनी लिखी है तो वह भोगेगा ही। भले ही बाद में मेरी सलाह दोबारा क्‍यों न लेने आना पड़े।


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