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हस्‍तरेखा : क्‍या बोलती हैं हाथ की रेखाएं

हस्‍तरेखा सामुद्रिक शास्‍त्र का प्रमुख भाग है। शौकिया तौर पर आपने भी कई बार लोगों के हाथ देखें होंगे, या फिर किसी पुस्‍तक में पढ़कर अपने हाथ को पढ़ने का प्रयास किया होगा। हस्‍तरेखा विज्ञान की प्राथमिक पुस्‍तकों के इतर इस लेख में हस्‍तरेखा के ऐसे योगों के बारे में चर्चा की गई है, जिनसे आप सटीक फलादेश निकाल सकें। इंसान के कर्मों के अनुसार हथेली की रेखाएं भी बनती और बिगड़ती रहती हैं। इसलिए रेखाओं का फल भी स्थाई नहीं रहता है। हालांकि अलग अलग पुस्‍तकों में इस योगों और विश्‍लेषणों के बारे में पूर्व में आ चुका है, यहां केवल इनका कंपाइलेशन किया गया है।

हस्तरेखा के शुभ संकेत

  1. यदि किसी व्यक्ति की हथेली में सूर्य रेखा से निकलकर कोई शाखा गुरु पर्वत की ओर जाती है तो व्यक्ति शासकीय अधिकारी बनता है।
  2. यदि हथेली में शुक्र पर्वत शुभ हो, विस्तृत हो और इस पर कोई अशुभ लक्षण ना हो तो व्यक्ति का स्वास्थ्य अच्छा रहता है। शुक्र पर्वत अंगू‌‌ठे नीचे वाले भाग को कहते हैं, इस पर्वत को जीवन रेखा घेरे हुए दिखाई देती है।
  3. बुध पर्वत पर एक छोटा सा त्रिभुज हो तो व्यक्ति प्रशासनिक विभाग में उच्च पद प्राप्त कर सकता है।
  4. स्वास्थ्य रेखा की लंबाई मस्तिष्क रेखा और भाग्य रेखा तक ही सीमित हो तो यह शुभ संकेत है। ऐसी स्वास्थ्य रेखा वाले व्यक्ति का स्वास्थ्य उत्तम रहता है। शुक्र पर्वत, जीवन रेखा के आसपास से प्रारंभ होकर बुध पर्वत की ओर जाने वाली रेखा को स्वास्थ्य रेखा कहते हैं। बुध पर्वत सबसे छोटी उंगली के नीचे होता है।
  5. यदि नाखून एकदम साफ और स्वच्छ दिखाई देते हैं तो यह शुभ लक्षण है। नाखूनों पर कोई दाग-धब्बा, कालापन न हो तो शुभ रहता है। शुभ नाखून अच्छे स्वास्थ्य की ओर इशारा करते हैं।
  6. अंगूठा मजबूत, लंबा, सुंदर हो तथा मस्तिष्क रेखा भी शुभ हो तो व्यक्ति नौकरी से लाभ प्राप्त करता है। शुभ मस्तिष्क रेखा यानी ये रेखा कटी हुई या टूटी हुई न हो, अन्य रेखाएं इसे काटती न हो, लंबी और सुंदर दिखाई देती हो।

हस्तरेखा के अशुभ संकेत

  1. यदि दोनों हथेलियों में हृदय रेखा कमजोर और अस्पष्ट दिखाई देती है तो व्यक्ति आलसी और कामचोर हो सकता है।
  2. यदि मणिबंध पर एक ही रेखा हो और वह भी अधूरी हो तो व्यक्ति का जीवन निरस होता है और इनके जीवन कोई उत्साह नहीं होता है।
  3. हथेली के दोनों मंगल पर्वत दबे हुए दिखाई दे रहे हों तो व्यक्ति कोई उपलब्धि हासिल नहीं कर पाता है। ये लोग किसी भी काम में उत्सुकता नहीं दिखाते हैं।
  4. यदि किसी व्यक्ति की हथेली में भाग्य रेखा के पास धन यानी जोड़ (+) का निशान हो तो जीवन में कष्ट प्राप्त होते हैं।
  5. यदि मस्तिष्क रेखा बहुत ही छोटी है तो व्यक्ति मृत्यु समान कष्ट पाता है।

रेखाओं और पर्वतों के हिन्दी नाम और इंग्लिश नाम

  1. जीवन रेखा- Life Line
  2. हृदय रेखा- Heart Line
  3. मस्तिष्क रेखा- Head Line
  4. सूर्य रेखा- Sun Line or Fame Line
  5. भाग्य रेखा- Fate Line
  6. शुक्र पर्वत- Venus Mount
  7. चंद्र पर्वत- Moon Mount
  8. गुरु पर्वत- Jupiter Mount
  9. मंगल पर्वत- Mars Mount
  10. शनि पर्वत- Saturn Mount
  11. सूर्य पर्वत- Sun Mount
  12. बुध पर्वत- Mercury Mount

हस्तरेखा से जुड़ी कुछ और बातें

  1. यदि किसी व्यक्ति की हथेली में चक्र जैसा कोई निशान बना हुआ है तो वह काफी महत्वपूर्ण है। हस्तरेखा ज्योतिष के अनुसार हथेली में चक्र का निशान अंगूठे पर हो तो व्यक्ति बहुत भाग्यशाली माना जाता है। इस प्रकार के निशान वाले व्यक्ति धनवान होते हैं। अंगूठे पर चक्र का निशान होने पर व्यक्ति ऐश्वर्यवान, प्रभावशाली, दिमाग से संबंधित कार्य में योग्य होता है। ऐसे लोग बुद्धि का प्रयोग करते हुए काफी धन लाभ प्राप्त करते हैं। ये लोग पिता के सहयोगी होते हैं। घर-परिवार एवं समाज में इन्हें पूर्ण मान-सम्मान प्राप्त होता है।
  2. यदि किसी व्यक्ति के दोनों हाथों में भाग्य रेखा मणिबंध से शुरू होकर सीधी शनि पर्वत तक जा रही हो, साथ में सूर्य रेखा भी पतली लम्बी, शुभ हो और मस्तिष्क रेखा, आयु रेखा भी अच्छी है तो उस हाथ में गजलक्ष्मी योग बनता हैं। ये योग अचानक धन लाभ दे सकता है।
  3. यदि शनि पर्वत यानी रिंग फिंगर के नीचे वाला क्षेत्र और शुक्र पर्वत अधिक भरा हुआ हो, सुंदर हो और भाग्य रेखा शुक्र पर्वत यानी अंगूठे के पास वाले क्षेत्र से आरंभ होकर शनि क्षेत्र के मध्य तक पहुंचती है तो ऐसे लोगों के जीवन में कभी भी धन संबंधी कमी नहीं होती है। ये लोग काफी पैसा कमाते हैं।
  4. यदि किसी व्यक्ति की हथेली में भाग्य रेखा व चन्द्र रेखा मिलकर एक साथ शनि पर्वत पर पहुंचे तो ऐसे लोग भी धनवान रहते हैं। हथेली में अंगूठे के ठीक नीचे शुक्र पर्वत होता है और शुक्र पर्वत की दूसरी ओर हथेली के अंतिम भाग पर चंद्र पर्वत होता है। इस चंद्र पर्वत से कोई रेखा निकलती है तो उसे चंद्र रेखा कहा जाता है।
  5. यदि भाग्य रेखा लिटिल फिंगर के नीचे के क्षेत्र से प्रारंभ होकर किसी भी रेखा से कटे बिना शनि पर्वत तक पहुंचती हो तो यह रेखा भी शुभ होती है। इसके प्रभाव से व्यक्ति धन संबंधी कार्यों में विशेष लाभ प्राप्त करता है।

ध्यान रखें- हस्तरेखा में दोनों हाथों की बनावट और रेखाओं का पूरा अध्ययन करना बहुत जरूरी है। यहां बताए गए फल हथेली की अन्य स्थितियों से बदल भी सकते हैं। इसी वजह से किसी व्यक्ति के बारे में सटीक भविष्यवाणी करना हो तो दोनों हथेलियों का अध्ययन करना चाहिए।


माथे की रेखाएं

माथे की ये रेखाएं विभिन्न ग्रहों से प्रभावित होती हैं। शरीर लक्षण विज्ञान के अनुसार मस्तक की इन रेखाओं को देखकर व्यक्ति के भूत, भविष्य, वर्तमान व स्वभाव के बारे में जानकारी प्राप्त की जा सकती है। इसके लिए व्यक्ति के मस्तक की स्थिति, आकार-प्रकार, रंग तथा चिकनाई का विशेष ध्यान रखा जाता है।

शनि रेखा

इस रेखा का स्थान मस्तक में सबसे ऊपर होता है। यह रेखा अधिक लंबी नहीं होती, केवल मस्तक के मध्य भाग में ही दिखाई देती है। समुद्र लक्षण विज्ञान के अनुसार इस रेखा के आस-पास का भाग शनि ग्रह से प्रभावित माना जाता है। जिसके मस्तक पर यह रेखा स्पष्ट दिखाई देती है, वह गंभीर स्वभाव का होता है। यदि एक उन्नत मस्तक (थोड़ा उठा हुआ) पर शनि रेखा हो तो ऐसे लोग रहस्यमयी, गंभीर व थोड़े अंहकारी होते हैं। इनके बारे में अधिक जानकारी बहुत कम लोगों के पास होती है। ये सफल जादूगर, ज्योतिर्विद या तांत्रिक हो सकते हैं।

बृहस्पति (गुरु) रेखा

मस्तक पर शनि रेखा से थोड़ी नीचे गुरु रेखा का स्थान होता है। यह रेखा आमतौर पर शनि रेखा की तुलना में थोड़ी लंबी होती है। यह रेखा पढ़ाई, विचार, अध्यात्म, इतिहास संबंधी रुचि एवं महत्वाकांक्षा आदि की सूचक होती है। जिस व्यक्ति के मस्तक पर यह रेखा लंबी एवं स्पष्ट दिखाई देती है, वह आत्मविश्वासी व अपनी बात का पक्का होता है। ऐसे लोगों पर आंख मूंद कर विश्वास किया जा सकता है। ऐसे लोग सरकारी नौकरी या शिक्षा के क्षेत्र में अपना नाम कमाते हैं।

मंगल रेखा

मस्तक के बीच में कुछ ऊपर एवं गुरु रेखा के नीचे मंगल रेखा होती है। इस रेखा की प्रवृत्ति को समझने से पूर्व व्यक्ति के दोनों कानों के ठीक ऊपर के स्थानों तथा उससे कुछ आगे कनपटियों के ठीक ऊपर के स्थानों को भी देखना चाहिए। यदि एक सपाट या उन्नत मस्तक पर मंगल रेखा अपने शुभ गुणों के साथ हो और व्यक्ति के कनपटी से ऊपर के स्थान थोड़े उठे हुए हों तो ऐसा व्यक्ति साहसी, स्वाभिमानी, वीर, धर्मालु, दूरदृष्टि रखने वाला, समझदार एवं रचनात्मक प्रवृत्ति का होता है। ऐसे लोग किसी प्रशासनिक पद पर, सेना या पुलिस के अधिकारी अथवा राजदूत हो सकते हैं। लेकिन यदि एक निम्न या संकुचित मस्तक पर अशुभ गुणों से युक्त मंगल रेखा हो और कनपटी के ऊपर के भाग भी उन्नत हों तो ऐसा व्यक्ति अपराधी प्रवृत्ति का होता है। ऐसे लोगों को बहुत जल्दी गुस्सा आ जाता है और वे किसी के साथ कुछ भी कर बैठते हैं।

बुध रेखा

इस रेखा का स्थान लगभग मस्तक के बीच में होता है। यह रेखा लंबी होती है और कभी-कभी तो व्यक्ति की दोनों कनपटियों के किनारों को स्पर्श करती हुई दिखाई देती है। बुध रेखा व्यक्ति की याददाश्त, अन्य विषयों में उसका ज्ञान, सूझ-बूझ एवं ईमानदारी की सूचक होती है। यदि यह रेखा शुभ गुणों से युक्त हो तो ऐसा व्यक्ति तेज याददाश्त वाला, कलात्मक कामों में रुचि लेने वाला, सही-गलत की सोच रखने वाला, उच्च मानसिक क्षमता वाला व पारखी प्रवृत्ति का होता है। ऐसे लोगों में किसी भी इंसान को पहचानने की क्षमता सामान्य तौर पर अधिक होती है।

शुक्र रेखा

इस रेखा का स्थान बुध रेखा के ठीक नीचे केवल मध्य भाग में होता है। यह रेखा आमतौर पर छोटे आकार की होती है। यह रेखा उत्तम स्वास्थ्य, भ्रमण प्रवृत्ति, आकर्षक एवं सम्मोहक व्यक्तित्व की सूचक होती है। उन्नत मस्तक पर यदि यह रेखा स्पष्ट रूप से दिखाई दे तो ऐसा व्यक्ति स्फूर्ति, आशा व उत्साह से भरा रहता है। ऐसे व्यक्ति उच्च जीवन शक्ति से युक्त, घूमने-फिरने वाले, सौंदर्य प्रेमी एवं जरूरी मुद्दों पर गंभीर होते हैं। ऐसे लोग स्वच्छ, साफ तथा सफेद रंग अधिक पसंद करते हैं।

सूर्य रेखा

इस रेखा का स्थान मनुष्य की दाईं आंख की भौंह के ऊपर होता है। यह रेखा अधिक लंबी नहीं होती, सिर्फ आंख के ऊपर सीमित होती है। यह रेखा प्रतिभा, मौलिकता, सफलता, यश तथा समृद्धि की प्रतीक होती है। यदि यह रेखा शुभ गुणों से युक्त हो तो ऐसे व्यक्ति में अद्भुत सूझबूझ होती है। ऐसे लोग अनुशासन में रहना पसंद करते हैं। ये लोग अच्छे गणितज्ञ, शासक या नेता हो सकते हैं। ये अपने सिद्धांतों तथा व्यवहार से लोगों को बहुत जल्दी प्रभावित कर लेते हैं।

चंद्र रेखा

यह रेखा बांई आंख की भौंह के ऊपर होती है। यदि यह रेखा सरल, सीधी व स्पष्ट हो तो ऐसा व्यक्ति कलाप्रेमी, एकांतप्रिय, विकसित बुद्धि वाला तथा कल्पनाशील होता है। इनकी रुचि चित्रकला, गायन, संगीत आदि क्षेत्रों में होती है। कभी-कभी ऐसी रेखा वाले लोग आध्यात्म प्रिय सिद्ध एवं दूरदृष्टि वाले होते हैं।


प्रेम-प्रसंग और विवाह

विवाह सभी 16 संस्कारों में से एक सर्वाधिक महत्वपूर्ण संस्कार है। शादी के बाद का जीवन कैसा रहेगा, यह जानने की जिज्ञासा अधिकांश लोगों को रहती है। विवाह और वैवाहिक जीवन से जुड़ी खास बातें जानने के लिए हस्तरेखा ज्योतिष श्रेष्ठ मार्ग है। विवाह संबंधी बातें जानने के लिए हथेली में विवाह रेखा का अध्ययन मुख्य रूप से किया जाता है। हमारी हथेली में थोड़े-थोड़े समय में कई रेखाएं बदलती रहती हैं। जबकि कुछ खास रेखाएं ऐसी हैं, जिनमें अधिक बड़े बदलाव नहीं होते हैं। इन महत्वपूर्ण रेखाओं में जीवन रेखा, भाग्य रेखा, हृदय रेखा, मणिबंध, सूर्य रेखा, विवाह और संतान रेखाएं शामिल हैं। हस्तरेखा ज्योतिष के अनुसार विवाह रेखा से किसी भी व्यक्ति के विवाह और प्रेम प्रसंग पर विचार किया जाता है। विवाह रेखा सबसे छोटी उंगली (लिटिल फिंगर) के नीचे वाले भाग पर आड़ी स्थिति में होती है। छोटी उंगली के नीचे वाले भाग को बुध पर्वत कहा जाता है। विवाह रेखा एक या एक से अधिक भी हो सकती है।

  1. हथेली में एक से अधिक विवाह रेखाएं प्रेम-प्रसंग की संख्या की ओर इशारा करती हैं। साथ ही, यह रेखा यह भी बताती है कि आपका वैवाहिक जीवन कैसा रहेगा। यदि विवाह रेखा नीचे की ओर बहुत अधिक झुकी हुई हों तो वैवाहिक जीवन में परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
  2. यदि किसी व्यक्ति के दोनों हाथों में विवाह रेखा के आरंभ में दो शाखाएं हो तो उस व्यक्ति की शादी टूटने का भय रहता है।
  3. यदि किसी स्त्री के हाथ में विवाह रेखा के आरंभ में द्वीप चिह्न हो तो उसका विवाह किसी धोखे से होने की संभावनाएं रहती हैं। साथ ही, यह निशान जीवन साथी के खराब स्वास्थ्य की ओर भी इशारा करता है।
  4. यदि किसी व्यक्ति के हाथ में विवाह रेखा बहुत अधिक नीचे की ओर झुकी हुई दिखाई दे रही है और वह हृदय रेखा को काटते हुए ओर नीचे चले जाए तो यह शुभ लक्षण नहीं माना जाता है। ऐसी रेखा वाले व्यक्ति का जीवन साथी उसकी मौजूदगी में ही गुजर सकता है।
  5. यदि किसी व्यक्ति की हथेली में विवाह रेखा लम्बी और सूर्य पर्वत तक जाने वाली है तो यह संपन्न और समृद्ध जीवन साथी का प्रतीक है।
  6. यदि बुध पर्वत से आई हुई कोई रेखा विवाह रेखा को काट दे तो व्यक्ति का वैवाहिक जीवन परेशानियों भरा होता है।
  7. विवाह रेखा अगर बीच में टूटी हो तो यह विवाह टूटने का संकेत माना जाता है। इसके लिए हथेली के दूसरे चिह्नों पर भी विचार करना चाहिए।
  8. यदि विवाह रेखा के अंत में किसी सांप की जीभ के समान दो शाखाएं हों तो यह पति-पत्नी के बीच वैचारिक मतभेद पैदा करती है।
  9. यदि किसी पुरुष के बाएं हाथ में दो विवाह रेखा है और दाएं हाथ में एक विवाह रेखा है तो ऐसे लोगों की पत्नी श्रेष्ठ होती है। इन लोगों की पत्नी बहुत अधिक प्रेम करने वाली और पति का बहुत अधिक ध्यान रखने वाली होती है।
  10. यदि दाएं हाथ में दो विवाह रेखा है और बाएं हाथ में एक विवाह रेखा है तो ऐसे लोगों की पत्नी अपने पति का अधिक ध्यान रखने वाली नहीं होती है।
  11. दोनों हाथों में विवाह रेखा समान लंबाई की और समान शुभ लक्षणों वाली होती है तो ऐसे लोगों का वैवाहिक जीवन सुखी होता है। इन लोगों का अपने जीवन साथी से काफी अच्छा तालमेल होता है।
  12. यदि किसी व्यक्ति के हाथ में विवाह रेखा ऊपर की ओर मुड़ जाए और छोटी उंगली तक पहुंच जाए तो ऐसे व्यक्ति के विवाह में काफी परेशानियां आती हैं। आमतौर पर ऐसी विवाह रेखा वाले इंसान का विवाह होना बहुत मुश्किल होता है यानी इन लोगों के अविवाहित रहने की संभावनाएं काफी अधिक होती हैं।
  13. यदि विवाह रेखा के अंत में त्रिशूल के समान चिह्न दिखाई दे रहा है तो व्यक्ति अपने जीवन साथी से बहुत अधिक प्रेम करने वाला होता है। ये प्रेम हद से अधिक हो जाता है। कुछ वर्षों बाद ऐसा व्यक्ति जीवन साथी के प्रति उदासीन भी हो जाता है।
  14. यदि विवाह रेखा को कोई खड़ी रेखा या रेखाएं काट रही हैं तो यह विवाह में देरी और बाधाओं का संकेत है।
  15. ऊपर की ओर मुड़ी हुई विवाह रेखा शुभ नहीं मानी जाती है। यदि ये रेखा थोड़ी सी ऊपर की ओर मुड़ गई है तो व्यक्ति का विवाह होने में बहुत बाधाएं आती हैं और विवाह हो भी जाता है तो वैवाहिक जीवन सुखी नहीं कहा जा सकता है।
  16. यदि किसी व्यक्ति के हाथ में विवाह रेखा और हृदय रेखा के बीच की दूरी बहुत ही कम है तो ऐसे लोगों का विवाह कम उम्र में होने की संभावनाएं होती हैं। आमतौर पर विवाह रेखा और हृदय रेखा के बीच की दूरी ही व्यक्ति के विवाह की उम्र बताती है। इन दोनों रेखाओं के बीच जितनी अधिक दूरी होगी विवाह उतने ही अधिक समय बाद होता है। ऐसी संभावनाएं काफी अधिक रहती हैं।
  17. यदि किसी व्यक्ति के हाथ में विवाह रेखा पर क्रॉस का निशान है तो हस्तरेखा ज्योतिष के अनुसार ऐसे लोगों का जीवन साथी जल्दी गुजर सकता है।
  18. यदि विवाह रेखा पर किसी वर्ग के समान चिह्न दिखाई दे रहा है तो यह जीवन साथी के खराब स्वास्थ्य का संकेत देता है।
  19. यदि विवाह रेखा के प्रारंभ में किसी द्वीप के समान चिह्न है तो जीवन साथी का कोई अनैतिक संबंध हो सकता है। द्वीप का चिह्न अंत में हो तो यह जीवन साथी के स्वास्थ्य के लिए बुरा संकेत है।
  20. यदि किसी व्यक्ति की हथेली में विवाह रेखा के प्रारंभ में तिल है तो यह जीवन साथी के बुरे स्वास्थ्य की ओर इशारा करता है। यदि यह तिल अधिक गहरा हो तो यह जीवन साथी के जीवन के लिए खतरे की ओर इशारा करता है।

ध्यान रखें यहां बताई गई बातें सिर्फ विवाह रेखा के आधार पर बताई गई हैं। अन्य रेखाओं के प्रभाव से विवाह रेखा का फलादेश बदल भी सकता है। दोनों हाथों की सभी रेखाओं और हाथों की बनावट की गहनता से अध्ययन करने पर सटीक जानकारी मिल सकती है।


प्रेम और संतान

किसी भी हथेली में हृदय रेखा वह रेखा है जो दिल से जुड़ी भावनाओं के विषय में बतलाती है। साथ ही किसी पुरुष के हाथ में हृदय रेखा संतान के जन्म के बारे में बतलाती है। जानते हैं हृदय रेखा के कौन से लक्षण क्या प्रभाव देते हैं। आमतौर पर किसी भी हथेली में हृदय रेखा तर्जनी उंगली या मध्यमा उंगली से शुरू होकर बुध पर्वत के नीचे तक जाती है।

  1. हृदय रेखा तर्जनी और मध्यमा उंगली के बीच से शुरू हुई हो तो स्वभाव के सच्चे व शांत होने के बारे में बतलाती है।
  2. किसी पुरुष के हाथ में हृदय रेखा संतान के होने या न होने के बारे में बतलाती है। हृदय रेखा अंतिम सिरे (बुध पर्वत के नीचे) पर श्रृंखलाकार हो रही हो तो यह लक्षण संतानोत्पत्ति का है। श्रृंखलाकार नहीं होने पर या तो संतान नहीं होती है या लंबे समय बाद संतान का जन्म होता है। यदि दोनों हाथों की हथेलियों में हृदय रेखा की यह स्थिति हो। तब यह लक्षण अधिक प्रभावी हो सकता है।

नोटः हथेली पर और भी कई निशान होते हैं, जिनसे संतान के जन्म के बारे में जाना जा सकता है। हथेली पर गुरु पर्वत और बुध पर्वत पर पाई जाने वाली विवाह रेखा व शुक्र पर्वत से संतान से जुड़ी बातों के बारे में अध्ययन किया जा सकता है।

  1. हृदय रेखा शनि क्षेत्र से शुरू हुई होे और सूर्य पर्वत तक पंहुच रही हो तो प्रेम में वासना होती है। ऐसा योग होने पर पूरी तरह से स्वार्थी व्यवहार हो सकता है।
  2. हृदय रेखा एक छोर से शुरु होकर दूूसरे छोर तक जाए। वर्तमान में जीने वाला स्वभाव होता है। सपनों की दुनिया से दूर रहते हैं। स्वभाव से भावुक व ईष्र्यालु भी हो सकते हैं।
  3. हृदय रेखा का लाल होना और अधिक गहरा होने से स्वभाव से तेज हो सकते हैं। किसी बुरी आदत का शिकार भी बन सकते हैं।
  4. दो हृदय रेखा हो। लेकिन उनमें किसी भी प्रकार का दोष न हो तो बुद्धि सात्विक होती है।
  5. हृदय रेखा का मध्य में टूटना प्रेम संबंधो में बिखराव हो सकता है।
  6. हृदय रेखा और मस्तिष्क रेखा दोनो एक छोर से शुरु होकर हथेली के दूसरे छोर पर तक जाए तो किसी की परवाह नहीं करने वाला स्वभाव हो सकता है।
  7. हृदय रेखा पतली हो। गहरी न होकर हल्की होने से स्वभाव रुखा हो सकता है।
  8. यदि हृदय रेखा गुरु पर्वत से शुरू होती है। तो यह दृढ़ निश्चयी और आदर्शवादी होने का संकेत है।
  9. हृदय रेखा तर्जनी उंगली के मूल से शुरू हो तो मानसिक रुप से परेशान रह सकते हैं।
  10. हृदय रेखा से छोटी-छोटी रेखाएं निकलकर मस्तिष्क रेखा की ओर जाए। यह स्थिति प्रेम संबंधो पर आंख मूंदकर विश्वास नहीं करने की ओर इशारा करती है।
  11. हथेली में हृदय रेखा न हो या बहुत छोटी हो तो यह प्रेम संबंधों में असफलता मिल सकती है।

संतान रेखा

यह बुध क्षेत्र (सबसे छोटी उंगली के नीचे वाले भाग को बुध क्षेत्र कहते हैं।) पर खड़ी रेखा के रूप में रहती है। यह रेखा एक से अधिक भी हो सकती है। इस रेखा से मालूम होता है कि व्यक्ति की कितनी संतान होंगी। संतान रेखा से यह भी मालूम हो जाता है कि व्यक्ति को संतान के रूप में कितनी लड़कियां और कितने लड़के प्राप्त होंगे। इस रेखा का अध्ययन बड़ी ही गहनता से किया जाना चाहिए, क्योंकि ये रेखाएं बहुत ही सूक्ष्म होती हैं। गहरी संतान रेखा पुत्र प्राप्ति की ओर इशारा करती है, जबकि हल्की संतान रेखाएं पुत्री प्राप्ति की ओर इशारा करती है।


हथेली में पर्वतों की स्थिति

– तर्जनी उंगली के नीचे गुरु पर्वत होता है।
– मध्यमा उंगली के नीचे शनि पर्वत होता है।
– अनामिका उंगली के नीचे सूर्य पर्वत होता है।
– सबसे छोटी उंगली के नीचे बुध पर्वत होता है।
– अंगूठे के नीचे शुक्र पर्वत होता है।
– शुक्र पर्वत के सामने हथेली के दूसरी ओर चंद्र पर्वत होता है।
– चंद्र पर्वत और बुध पर्वत के मध्य मंगल पर्वत रहता है।

विशेष- हथेली पर पाए जाने वाले पर्वतों, रेखाओं के कारण हृदय रेखा से प्राप्त होने वाले परिणामों में अंतर आ जाता है। गुरु पर्वत, शुक्र पर्वत और विवाह रेखा से प्राप्त होने वाले परिणामों का गहरा प्रभाव हृदय रेखा पर पड़ता है। साथ ही समय के साथ-साथ हाथों की रेखाओं में भी परिवर्तन होते हैं। इसलिए परिणामों को स्थायी नहीं कहां जा सकता है।


हथेली में तिल

हस्तरेखा ज्योतिष के अनुसार हथेली की रेखाएं बनती-बिगड़ती रहती हैं, कभी-कभी हथेली में काले तिल भी बन जाते हैं। हथेली के अलग-अलग भागों पर बनने वाले तिल अलग-अलग बातों की भविष्यवाणी करते हैं।

  1. हथेली के शुक्र पर्वत पर तिल होने से व्यक्ति के विचारों की पवित्रता खत्म हो सकती है।
  2. जिन लोगों की हथेली में चंद्र पर्वत पर तिल स्थित है, उन्हें पानी (नदी, तालाब, कुएं, समुद्र) से सावधान रहना चाहिए। इन लोगों के विवाह में भी देर हो सकती है।
  3. यदि गुरु पर्वत पर तिल होता है तो विवाह में परेशानियां आती हैं। किसी भी काम में उचित सफलता प्राप्त नहीं हो पाती है।
  4. शनि पर्वत पर तिल होने से विवाह में विलंब होता है और वैवाहिक जीवन भी संतोषजनक नहीं रहता है।
  5. सूर्य पर्वत पर तिल है तो यह मान-सम्मान के लिए शुभ नहीं होता है। सूर्य पर्वत पर तिल हो तो व्यक्ति को समाज में अपमान का सामना करना पड़ सकता है।
  6. यदि किसी व्यक्ति की हथेली के बुध पर्वत पर तिल का निशान बन जाता है तो अचानक कोई नुकसान हो सकता है। बुध पर्वत सबसे छोटी उंगली के नीचे स्थित होता है। जब हथेली में ऐसी स्थिति बने तो सावधानीपूर्वक कार्य करना चाहिए।

रेखाओं पर तिल

  1. यदि जीवन रेखा पर तिल स्वास्थ्य के लिए अच्छा नहीं माना जाता है। इस रेखा पर तिल हो तो गंभीर रोग हो सकता है।
  2. हथेली में मस्तिष्क रेखा पर तिल हो तो व्यक्ति को सिर से जुड़ी किसी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
  3. हृदय रेखा पर तिल स्वास्थ्य के लिए अच्छा नहीं होता है।
  4. भाग्य रेखा पर तिल होने पर व्यक्ति को भाग्य का साथ नहीं मिल पाता है। ऐसी स्थिति में व्यक्ति को कड़ी मेहनत करना पड़ती है, लेकिन आशा के अनुरूप फल प्राप्त नहीं हो पाता है।
  5. विवाह रेखा पर तिल होने से विवाह में देरी हो सकती है। वैवाहिक जीवन में भी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

हस्तरेखा ज्योतिष के अनुसार हथेली की रेखाएं बनती-बिगड़ती रहती हैं, कभी-कभी हथेली में काले तिल भी बन जाते हैं। हथेली के अलग-अलग भागों पर बनने वाले तिल अलग-अलग बातों की भविष्यवाणी करते हैं।

  1. हथेली के शुक्र पर्वत पर तिल होने से व्यक्ति के विचारों की पवित्रता खत्म हो सकती है।
  2. जिन लोगों की हथेली में चंद्र पर्वत पर तिल स्थित है, उन्हें पानी (नदी, तालाब, कुएं, समुद्र) से सावधान रहना चाहिए। इन लोगों के विवाह में भी देर हो सकती है।
  3. यदि गुरु पर्वत पर तिल होता है तो विवाह में परेशानियां आती हैं। किसी भी काम में उचित सफलता प्राप्त नहीं हो पाती है।
  4. शनि पर्वत पर तिल होने से विवाह में विलंब होता है और वैवाहिक जीवन भी संतोषजनक नहीं रहता है।
  5. सूर्य पर्वत पर तिल है तो यह मान-सम्मान के लिए शुभ नहीं होता है। सूर्य पर्वत पर तिल हो तो व्यक्ति को समाज में अपमान का सामना करना पड़ सकता है।
  6. यदि किसी व्यक्ति की हथेली के बुध पर्वत पर तिल का निशान बन जाता है तो अचानक कोई नुकसान हो सकता है। बुध पर्वत सबसे छोटी उंगली के नीचे स्थित होता है। जब हथेली में ऐसी स्थिति बने तो सावधानीपूर्वक कार्य करना चाहिए।
  7. यदि जीवन रेखा पर तिल स्वास्थ्य के लिए अच्छा नहीं माना जाता है। इस रेखा पर तिल हो तो गंभीर रोग हो सकता है।
  8. हथेली में मस्तिष्क रेखा पर तिल हो तो व्यक्ति को सिर से जुड़ी किसी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
  9. हृदय रेखा पर तिल स्वास्थ्य के लिए अच्छा नहीं होता है।
  10. भाग्य रेखा पर तिल होने पर व्यक्ति को भाग्य का साथ नहीं मिल पाता है। ऐसी स्थिति में व्यक्ति को कड़ी मेहनत करना पड़ती है, लेकिन आशा के अनुरूप फल प्राप्त नहीं हो पाता है।
  11. विवाह रेखा पर तिल होने से विवाह में देरी हो सकती है। वैवाहिक जीवन में भी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

छोटी उंगली : खास बातें

आमतौर पर हमारी हथेली की सबसे छोटी उंगली से अधिक भारी और बड़े काम नहीं किए जा सकते हैं। यह उंगली अन्य उंगलियों के साथ मिलकर ही भारी काम करने में मदद कर पाती है, लेकिन हस्तरेखा ज्योतिष के अनुसार छोटी उंगली भी कई बड़ी बातें बता देती है। कनिष्ठा उंगली की लंबाई और मोटाई के साथ ही इस पर स्थित अलग-अलग निशान और रेखाओं का अध्ययन किया जाता है। इन छोटे-छोटे संकेतों के आधार पर व्यक्ति के स्वभाव और भविष्य की बातें मालूम हो जाती हैं। हथेली, अंगूठा, उंगलियों की बनावट और रेखाओं के साथ ही अलग-अलग निशानों के आधार पर व्यक्ति के भविष्य और स्वभाव की बातें बताने वाली विद्या है, हस्तरेखा ज्योतिष।

  1. यदि हथेली में छोटी उंगली सामान्य लंबाई से बहुत छोटी है तो ऐसा व्यक्ति जल्दबाजी में काम करने वाला होता है। ऐसे लोग नासमझ हो सकते हैं और ये व्यवहार कुशल भी नहीं होते हैं।
  2. जिन लोगों की यह उंगली आगे से नुकीली होती है, वे बुद्धिमान होते हैं। ऐसे लोगों का दिमाग बहुत तेज चलता है।
  3. छोटी उंगली अधिक लंबी होने पर व्यक्ति बहुत चालक हो सकता है। ऐसे लोग अपनी चतुराई से कार्यों में सफलता प्राप्त कर लेते हैं।
  4. जिन लोगों की हथेली में छोटी उंगली सामान्य लंबाई वाली रहती है, वे लोग घर-परिवार और समाज में उचित मान-सम्मान प्राप्त करते हैं। अपनी योग्यता के बल पर कार्यों में सफलता प्राप्त करते हैं।
  5. यदि छोटी उंगली का अंतिम भाग चौकोर दिखाई देता है तो व्यक्ति दूरदर्शी होता है। ऐसे लोग विलक्षण प्रतिभा के धनी होते हैं।
  6. जिन लोगों की छोटी उंगली टेढ़ी होती है, वे जीवन में कई बार अयोग्य साबित हो सकते हैं। ये लोग ठीक से कार्य नहीं कर पाते हैं।
  7. जिन लोगों की छोटी उंगली सुंदर दिखाई देती है, वे लोग सर्वगुण संपन्न होते हैं।
  8. यदि किसी व्यक्ति के हाथ में छोटी उंगली (लिटिल फिंगर) और अनामिका उंगली (रिंग फिंगर), दोनों बराबर हैं तो व्यक्ति राजनीति में प्रभावी होता है। ऐसे लोग अच्छे राजनीतिज्ञ हो सकते हैं।
  9. यदि छोटी उंगली, अनामिका उंगली की ओर झुकी हुई दिखाई देती है तो व्यक्ति अच्छा व्यापारी होता है।
  10. जिन लोगों की छोटी उंगली, अनामिका उंगली से दूर होती है, वे लोग अपने कार्य को पूरी आजादी से करना पसंद करते हैं।
  11. यदि सबसे छोटी उंगली अच्छी स्थिति में हो, सुंदर हो, भरी हुई हो, लंबी हो तो व्यक्ति दूसरों को बहुत जल्दी प्रभावित करने वाला होता है।
  12. यदि किसी व्यक्ति की छोटी उंगली का पहला भाग (ऊपर वाला हिस्सा) अधिक लंबा होगा तो वह बातचीत का शौकीन होता है। इन लोगों को दूसरों को संबोधित करने की विशेष क्षमता होती है।
  13. इस उंगली का दूसरा भाग (बीच वाला हिस्सा) अधिक लंबा हो तो व्यक्ति बहुत चतुर होता है। इनका व्यवहारिक पहलू मजबूत होता है।
  14. यदि छोटी उंगली का अंतिम भाग (नीचे वाला हिस्सा) अधिक लंबा हो तो व्यक्ति खरीदारी के मामले में चतुर होता है।
  15. यदि लिटिल फिंगर और इंडेक्स फिंगर की लंबाई बराबर हो तो वह व्यक्ति कुशल राजनीतिज्ञ होता है। ऐसे लोग अपनी योजनाओं से कार्य पूर्ण कर लेते हैं।
  16. हथेली की सबसे लंबी उंगली (मध्यमा उंगली) और सबसे छोटी उंगली की लंबाई बराबर हो तो व्यक्ति विज्ञान के क्षेत्र में उपलब्धियां हासिल करता है।
  17. यदि छोटी उंगली, अनामिका उंगली के नाखून तक पहुंचती है तो व्यक्ति लेखक, कलाकार और रचनात्मक कार्य करने वाला होता है।
  18. यदि छोटी उंगली के पहले भाग (ऊपर वाला हिस्सा) पर खड़ी रेखाएं होती हैं तो व्यक्ति अच्छा वक्ता होता है। इस स्थिति के साथ ही हथेली अन्य बातें भी सामान्य होनी चाहिए।
  19. छोटी उंगली के पहले भाग पर आड़ी रेखाएं हों तो व्यक्ति बहुत बातूनी होता है। ऐसे लोग झूठ भी बोलते हैं।
  20. यदि उंगली के पहले भाग पर त्रिभुज का निशान बना है तो व्यक्ति धर्म और आध्यात्म में रुचि रखने वाला होता है।
  21. छोटी उंगली के पहले भाग पर जाली का निशान हो तो व्यक्ति चोरी करने वाला या गलत आदतों का शिकार होता है।
  22. यदि किसी व्यक्ति की छोटी उंगली के दूसरे भाग पर अस्पष्ट रेखाएं होती हैं तो व्यक्ति अनैतिक कार्य करने वाला हो सकता है।
  23. इस उंगली के दूसरे भाग पर आड़ी रेखाएं होती हैं तो व्यक्ति भावुक होता है।
  24. छोटी उंगली के दूसरे भाग पर क्रॉस का निशान होने पर व्यक्ति का जीवन सुखी नहीं होता है।
  25. यदि छोटी उंगली पर खड़ी रेखाएं होती हैं तो व्यक्ति की रुचि मनोविज्ञान के क्षेत्र में होती है।
  26. यदि छोटी उंगली के तीसरे भाग यानी नीचे वाले हिस्से पर यदि खड़ी रेखाएं अस्पस्ट और टेढ़ी हों तो व्यक्ति गलत आदतों का शिकार हो सकता है।
  27. इस उंगली के तीसरे भाग पर त्रिभुज का निशान हो तो व्यक्ति जीवन में कोई प्रतिष्ठित पद प्राप्त करने वाला होता है।
  28. छोटी उंगली के अंतिम भाग पर वृत्त का निशान बना हो तो व्यक्ति बेईमान हो सकता है। ऐसे लोग ईमानदारी दिखावा करने वाले होते हैं।
  29. यदि छोटी उंगली के अंतिम भाग पर वर्ग का निशान हो तो व्यक्ति अनिश्चित व्यवहार करने वाला होता है।
  30. यदि छोटी उंगली आगे या पीछे की ओर अधिक मुड़ी हुई दिखाई देती है तो व्यक्ति बेईमान हो सकता है।

ध्यान रखें- हस्तरेखा में दोनों हाथों की बनावट और रेखाओं का पूरा अध्ययन करना बहुत जरूरी है। यहां बताए गए लिटिल फिंगर के फल हथेली की अन्य स्थितियों से बदल भी सकते हैं। इसी वजह से किसी व्यक्ति के बारे में सटीक भविष्यवाणी करना हो तो दोनों हथेलियों का अध्ययन करना चाहिए।


अंगूठे की खासियत

हथेली में रेखाओं के साथ ही उंगलियों और हथेली की बनावट का भी अध्ययन किया जाता है। अंगूठा भी स्वभाव और भविष्य से जुड़ी कई बातें बता सकता है। हमारा अंगूठा तीन भागों में विभक्त रहता है। प्रथम भाग ऊपर वाला, फिर मध्यम भाग और अंतिम भाग। ये तीनों भाग रेखाओं से विभाजित रहते हैं। यदि पहला भाग अधिक लंबा हो तो व्यक्ति अच्छी इच्छा शक्ति वाला होता है। वह किसी पर निर्भर नहीं होता। ऐसे अंगूठे वाले लोग किसी भी कार्य को पूरी स्वतंत्रता के साथ करना पसंद करते हैं और इन्हें सफलता भी प्राप्त हो जाती है। कार्यों में सफलता के साथ ही इनकी आर्थिक स्थिति में भी सुधार होता है।

  1. यदि अंगूठे के पहले पर्व (भाग) पर आड़ी रेखाएं होती हैं तो व्यक्ति को जीवन में महालक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती है। भाग्य का साथ मिलता है। ऐसे लोगों को धन संबंधी कार्यों में कभी भी परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ता है।
  2. यदि किसी व्यक्ति की हथेली में अंगूठे के पहले भाग पर बहुत सी खड़ी रेखाएं होती हैं तो वह ईमानदार और भरोसेमंद होता है।
  3. जिन लोगों की हथेली में अंगूठे के पहले पर्व पर तीन खड़ी रेखाएं होती हैं, उनकी इच्छा शक्ति प्रबल होती है और इनका दिमाग भी बहुत तेज चलता है।
  4. हस्तरेखा ज्योतिष के अनुसार जिन लोगों की हथेली में सामान्य से छोटे अंगूठा होता है, वे लोग निर्बल हो सकते हैं। ऐसे लोगों की कार्य क्षमता काफी कम होती है और हर कार्य को बहुत धीरे-धीरे करते हैं।
  5. जिन लोगों के अंगूठे के पहले पर्व पर क्रॉस का निशान होता है, वे बहुत अधिक खर्चीले होते हैं। ये लोग अधिक व्यय के कारण परेशानियों का सामना करते हैं।
  6. यदि अंगूठा का मध्यम भाग अधिक लंबा हो तो व्यक्ति की तर्क शक्ति काफी उन्नत होती है। तर्क शक्ति के कारण इन लोगों का दिमाग भी काफी तेज चलता है। अपनी बुद्धि के बल पर इन्हें समाज में मान-सम्मान प्राप्त होता है।
  7. यदि अंगूठे के दूसरे पर्व पर कोई गोलाकार निशान हो तो व्यक्ति बहुत अधिक बहस करने वाला होता है।
  8. यदि किसी व्यक्ति की हथेली में अंगूठे के दूसरे पर्व पर तीन खड़ी रेखाएं होती हैं तो व्यक्ति की तर्क शक्ति अच्छी रहती है। जबकि यहां आड़ी रेखाएं होती हैं तो व्यक्ति कुतर्क करने वाला हो सकता है।
  9. यदि किसी व्यक्ति के अंगूठे के दूसरे पर्व पर त्रिभुज का निशान बना हो तो व्यक्ति विज्ञान के क्षेत्र में कार्य करने वाला होता है।
  10. यदि किसी व्यक्ति के अंगूठे के दूसरे पर्व पर जाली का निशान बना हो तो व्यक्ति चरित्र का अच्छा नहीं माना जाता है। सामान्यत: ऐसे लोग बेईमान भी हो सकते हैं।
  11. हस्तरेखा ज्योतिष के अनुसार जो लोग बुद्धिमान और चतुर होते हैं, उनका अंगूठा सुंदर और आकर्षक होता है। ये लोग किसी भी काम को चतुराई के साथ पूर्ण करते हैं और लाभ भी कमाते हैं।
  12. अंगूठे का अंतिम भाग यानी शुक्र पर्वत (अंगूठे एकदम नीचे वाले भाग से लगा हुआ शुक्र पर्वत होता है।) के पास वाला भाग अधिक लंबा हो तो व्यक्ति अति कामुक होता है।
  13. ऐसे अधिकांश लोग जिनकी हथेली में अंगूठा छोटा, बेडौल और सामान्य से अधिक मोटा होता है, वे सामान्यत: असभ्य और दूसरों का निरादर करने वाले होते हैं। ऐसे लोग कई बार क्रूर भी हो जाते हैं और दूसरों को नुकसान भी पहुंचा सकते हैं।
  14. जिस व्यक्ति का अंगूठा सामान्य से ज्यादा लंबा और हथेली के साथ मजबूती से जुड़ा हुआ होता है, वह सर्वगुण संपन्न होता है। इन लोगों में घर-परिवार और समाज के बीच घुल-मिलकर रहने के सभी गुण होते हैं। इन्हें उचित मान-सम्मान प्राप्त होता है।
  15. जो लोग अधिक कल्पनाशील होते हैं, सामान्यत: उनकी हथेली में अंगूठा लचीला होता है। लचीला अंगूठा आसानी से पीछे की ओर मुड़ जाता है। ऐसे लोग अधिक खर्चीले भी होते हैं। इन्हें हर काम को कलात्मक ढंग से करना पसंद होता है।
  16. हस्तरेखा ज्योतिष के अनुसार सामान्यत: जिन लोगों का अंगूठा अधिक मोटा होता है, उनका स्वभाव अच्छा नहीं माना जाता है।
  17. चपटे अंगूठे वाले लोग निराशजनक स्वभाव वाले होते हैं। जबकि, जिन लोगों के अंगूठे अधिक चौड़े होते हैं, वे क्रोधी स्वभाव के होते हैं।
  18. जिन लोगों का अंगूठा बड़ा होता है, वे कलात्मक स्वभाव के होते हैं।
  19. जिन लोगों का अंगूठा पतला होता है, वे अपने स्वभाव के कारण घर-परिवार और समाज में मान-सम्मान प्राप्त करते हैं।
  20. जो लोग अपनी दोनों हथेलियों के अंगूठों को उंगलियों में दबाकर कर रखते हैं, ऐसे अधिकांश लोग डरपोक होते हैं। ऐसा करने वाले व्यक्ति में आत्म विश्वास की कमी होती है। ये लोग हर कार्य को डरते-डरते करते हैं। इन्हें कार्यों में सफलता मिलने में भी संदेह रहता है।

नोट- हस्तरेखा के अनुसार दोनों हाथों की गहराई से जांच करने के बाद ही सटीक भविष्यवाणी की जा सकती हैं। यहां बताए गए अंगूठे के प्रभाव हथेली की अन्य स्थितियों से प्रभावित हो सकते हैं। अत: यह बात ध्यान रखने योग्य है।


भाग्य रेखा

हमारी हथेली में कई प्रकार की रेखाएं होती हैं, जैसे- जीवन रेखा, हृदय रेखा, मस्तिष्क रेखा, विवाह रेखा, सूर्य रेखा, बुध रेखा, भाग्य रेखा आदि। हस्तरेखा ज्योतिष के अनुसार भाग्य रेखा बताती है कि व्यक्ति भाग्यशाली है या नहीं। भाग्य रेखा सामान्यत: जीवन रेखा, मणिबंध, मस्तिष्क रेखा, हृदय रेखा या चंद्र पर्वत से प्रारंभ होकर शनि पर्वत (मध्यमा उंगली के नीचे वाला भाग शनि पर्वत कहलाता है) की ओर जाती है।

  1. यदि किसी व्यक्ति की हथेली में भाग्य रेखा मणिबंध से प्रारंभ होकर शनि पर्वत तक गई हो और दोष रहित है तो व्यक्ति भाग्यशाली होता है। ऐसे लोग जीवन में सफलताएं प्राप्त करते हैं।
  2. यदि हथेली में भाग्य रेखा जीवन रेखा से प्रारंभ हो तो व्यक्ति खुद की मेहनत से काफी अधिक धन प्राप्त करता है।
  3. जिन लोगों की हथेली में भाग्य रेखा चंद्र क्षेत्र से प्रारंभ हुई है, वे दूसरों की मदद या प्रोत्साहन से सफलता प्राप्त करने वाले हो सकते हैं।
  4. यदि चंद्र पर्वत से निकलकर कोई अन्य रेखा भाग्य रेखा के साथ-साथ चले तो व्यक्ति की शादी अत्यंत धनी परिवार में होती है। वह व्यक्ति किसी स्त्री की मदद से सफलताएं प्राप्त करता है।
  5. यदि भाग्य रेखा हथेली को पार करते हुए मध्यमा उंगली (मिडिल फिंगर) तक जा पहुंचे तो यह अशुभ योग दर्शाती है। ऐसा व्यक्ति खुद की गलतियों से हानि उठाता है।
  6. यदि भाग्य रेखा किसी स्थान पर जीवन रेखा को काट दे तो उस आयु में व्यक्ति को कोई अपमान या कलंक झेलना पड़ सकता है।
  7. भाग्य रेखा हथेली के प्रारंभ से जितनी अधिक दूरी से शुरू होती है, व्यक्ति का भाग्योदय उतने ही विलंब से होता है।
  8. भाग्य रेखा टूटी हुई या अन्य रेखाओं से कटी हुई हो तो यह भाग्यहीनता का संकेत है।
  9. भाग्य रेखा हृदय रेखा पर रुक जाए तो व्यक्ति प्रेम संबंध के कारण असफलताएं प्राप्त करता है, लेकिन यह रेखा हृदय रेखा के साथ गुरु पर्वत तक जा पहुंचे तो वह व्यक्ति प्रेम संबंध से सफलताएं प्राप्त करता है।
  10. हथेली में दो भाग्य रेखाएं बहुत शुभ होती है।
  11. यदि भाग्य रेखा मस्तिष्क रेखा पर रुक जाए तो व्यक्ति खुद की गलती से असफलताएं प्राप्त करता है।

जीवन रेखा

हथेली में सामान्यत: तीन रेखाएं मुख्य रूप से दिखाई देती हैं। ये तीन रेखाएं जीवन रेखा, मस्तिष्क रेखा और हृदय रेखा है। इनमें से जो रेखा अंगूठे के ठीक नीचे शुक्र पर्वत को घेरे रहती है, वही जीवन रेखा कहलाती है। यह रेखा इंडेक्स फिंगर के नीचे स्थित गुरु पर्वत के आसपास से प्रारंभ होकर हथेली के अंत मणिबंध की ओर जाती है। छोटी जीवन रेखा कम उम्र और लंबी जीवन रेखा लंबी उम्र की ओर इशारा करती है। यदि जीवन रेखा टूटी हुई हो तो यह अशुभ होती है, लेकिन उसके साथ ही कोई अन्य रेखा समानांतर रूप से चल रही हो तो इसका अशुभ प्रभाव नष्ट हो सकता है।

  1. हस्तरेखा ज्योतिष में बताया गया है कि लंबी, गहरी, पतली और साफ जीवन रेखा शुभ होती है। जीवन रेखा पर क्रॉस का चिह्न अशुभ होता है। यदि जीवन रेखा शुभ है तो व्यक्ति की आयु लंबी होती है और उसका स्वास्थ्य भी अच्छा रहता है।
  2. यदि मस्तिष्क रेखा (मस्तिष्क रेखा और जीवन रेखा लगभग एक ही स्थान से प्रारंभ होती है) और जीवन रेखा के मध्य थोड़ा अंतर हो तो व्यक्ति स्वतंत्र विचारों वाला होता है।
  3. यदि मस्तिष्क रेखा और जीवन रेखा के मध्य अधिक अंतर हो तो व्यक्ति बिना सोच-विचार के कार्य करने वाला होता है।
  4. यदि दोनों हाथों में जीवन रेखा टूटी हुई हो, तो व्यक्ति को असमय मृत्यु समान कष्टों का सामना करना पड़ सकता है। यदि एक हाथ में जीवन रेखा टूटी हो और दूसरे हाथ में यह रेखा ठीक हो, तो यह किसी गंभीर बीमारी की ओर इशारा करती है।
  5. यदि किसी व्यक्ति के हाथ में जीवन रेखा श्रृंखलाकार या अलग-अलग टुकड़ों से जुड़ी हुई या बनी हुई हो तो व्यक्ति निर्बल हो सकता है। ऐसे लोग स्वास्थ्य की दृष्टि से भी परेशानियों का सामना करते हैं। ऐसा विशेषत: तब होता है, जब हाथ बहुत कोमल हो। जब जीवन रेखा के दोष दूर हो जाते हैं तो व्यक्ति का जीवन सामान्य हो जाता है।
  6. यदि जीवन रेखा से कोई शाखा गुरु पर्वत क्षेत्र (इंडेक्स फिंगर के नीचे वाले भाग को गुरु पर्वत कहते हैं।) की ओर उठती दिखाई दे या गुरु पर्वत में जा मिले तो इसका अर्थ यह समझना चाहिए कि व्यक्ति को कोई बड़ा पद या व्यापार-व्यवसाय में तरक्की प्राप्त होती है।
  7. यदि जीवन रेखा से कोई शाखा शनि पर्वत क्षेत्र (मिडिल फिंगर के नीचे वाले भाग को शनि पर्वत कहते हैं।) की ओर उठकर भाग्य रेखा के साथ-साथ चलती दिखाई दे तो इसका अर्थ यह होता है कि व्यक्ति को धन-संपत्ति का लाभ मिल सकता है। ऐसी रेखा के प्रभाव से व्यक्ति को सुख-सुविधाओं की वस्तुएं भी प्राप्त हो सकती हैं।
  8. यदि जीवन रेखा, हृदय रेखा और मस्तिष्क रेखा तीनों प्रारंभ में मिली हुई हो तो व्यक्ति भाग्यहीन, दुर्बल और परेशानियों से घिरा होता है। (हृदय रेखा इंडेक्स फिंगर और मिडिल फिंगर के आसपास से प्रारंभ होकर सबसे छोटी उंगली की ओर जाती है।)
  9. यदि जीवन रेखा को कई छोटी-छोटी रेखाएं काटती हुई नीचे की ओर जाती हो तो ये रेखाएं व्यक्ति के जीवन में परेशानियों को दर्शाती हैं। यदि इस तरह की रेखाएं ऊपर की ओर जा रही हों तो व्यक्ति को सफलता प्राप्त होती है।
  10. यदि जीवन रेखा गुरु पर्वत से प्रारंभ हुई हो तो व्यक्ति अति महत्वाकांक्षी होता है। ये लोग अपनी आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं।
  11. जब टूटी हुई जीवन रेखा शुक्र पर्वत के भीतर की ओर मुड़ती दिखाई देती है तो यह अशुभ लक्षण होता है। ऐसी जीवन रेखा बताती है कि व्यक्ति को किसी बड़े संकट का सामना करना पड़ सकता है।
  12. यदि जीवन रेखा अंत में दो भागों में विभाजित हो गई हो तो व्यक्ति की मृत्यु जन्म स्थान से दूर होती है।
  13. जीवन रेखा पर वर्ग का चिह्न हो तो यह व्यक्ति के जीवन की रक्षा करता है। आयु के संबंध में जीवन रेखा के साथ ही स्वास्थ्य रेखा, हृदय रेखा, मस्तिष्क रेखा और अन्य छोटी-छोटी रेखाओं पर भी विचार किया जाना चाहिए।
  14. यदि दोनों हाथों में जीवन रेखा बहुत छोटी हो तो वह व्यक्ति अल्पायु हो सकता है। जीवन रेखा जहां-जहां श्रृंखलाकार होगी, उस आयु में व्यक्ति किसी बीमारी से ग्रसित हो सकता है।
  15. यदि किसी व्यक्ति के हाथ में जीवन रेखा चंद्र पर्वत तक चली जाए तो व्यक्ति का जीवन अस्थिर हो सकता है। अंगूठे के नीचे वाले भाग को शुक्र पर्वत कहते हैं और शुक्र के दूसरी ओर चंद्र पर्वत स्थित होता है। यदि इस प्रकार की जीवन रेखा कोमल हाथों में हो और मस्तिष्क रेखा भी ढलान लिए हुए हो, तो व्यक्ति का स्वभाव स्थिर होता है। इस प्रकार के लोग साहस भरे और उत्तेजना से पूर्ण कार्य करना चाहते हैं।

अन्‍य महत्‍वपूर्ण रेखाएं

मस्तिष्क रेखा: यह रेखा हथेली के मध्य भाग में आड़ी स्थिति में रहती है। मस्तिष्क रेखा जीवन रेखा के प्रारंभिक स्थान के पास से ही शुरू होती है। मस्तिष्क रेखा यहां से प्रारंभ होकर हथेली की दूसरी ओर जाती है।

हृदय रेखा: यह रेखा मस्तिष्क रेखा के बराबर चलती है। हृदय रेखा की शुरुआत हथेली पर बुध पर्वत (सबसे छोटी उंगली के नीचे वाला भाग) के नीचे से आरंभ होकर गुरु पर्वत (इंडेक्स फिंगर के नीचे वाले भाग को गुरु पर्वत कहते हैं।) की ओर जाती है।

मणिबंध: हथेली जिस स्थान से प्रारंभ होती है, वहां आड़ी अवस्था में कुछ रेखाएं होती हैं, इन्हीं रेखाओं को मणिबंध कहा जाता है।

सूर्य रेखा: यह रेखा सामान्यत: हथेली के मध्यभाग में रहती हैं। सूर्य रेखा मणिबंध (हथेली के अंतिम छोर के नीचे स्थित आड़ी रेखाओं को मणिबंध कहते हैं।) से ऊपर रिंग फिंगर के नीचे वाले सूर्य पर्वत की ओर जाती है।

स्वास्थ्य या बुध रेखा: यह बुध पर्वत (सबसे छोटी उंगली के नीचे वाले भाग को बुध पर्वत कहते हैं।) से आरंभ होकर शुक्र पर्वत (अंगूठे के नीचे वाले भाग को शुक्र पर्वत कहते हैं) की ओर जाती है।


हस्‍तरेखाओं में रोग के निशान

हथेली की रेखाओं से यह भी मालूम किया जा सकता है कि भविष्य में किसी व्यक्ति को कौन से रोग हो सकते

  • पेट रोग- किसी व्यक्ति की हथेली में चन्द्र पर्वत पर नक्षत्र चिह्न हो तो पेट रोग होने की संभावना रहती है।
  • हृदय रोग- जिसकी हृदय रेखा में द्विप वृत्त चिह्न हो शनि क्षेत्र के नीचे मस्तिष्क रेखा का रंग पीला हो या आयु रेखा के पास वाले मंगल क्षेत्र पर काला बिन्दु हो या हृदय रेखा पर काले तिल का चिह्न हो एवं द्विप हो तो व्यक्ति को आकस्मिक मूर्छा तथा हृदय रोग हो सकता है।
  • आंत रोग- यदि रेखाएं पीले रंग की हो, नाखून रक्त वर्ण एवं धब्बेदार हो तथा बुध रेखा खंडित हो तो व्यक्ति को आंतों की बीमारी हो सकती है।
  • रीढ़ का रोग- यदि हृदय रेखा पर शनि के नीचे द्विप चिह्न हो तो व्यक्ति को रीढ़ की बीमारी हो सकती है।
  • दांतों का रोग- जिस व्यक्ति की हथेली में शनि क्षेत्र उच्च हो और उस पर अधिक रेखाएं हो बुध शनि रेखा लहरदार एवं लम्बी हो उंगलियों के द्वितीय भाग लंबे हो तो दांत के रोग हो सकते हैं।
  • गुर्दे का रोग- यदि मस्तिष्क रेखा पर, मंगल के समीप सफेद रंग के दाग हो एवं दोनों हाथों की हृदय रेखा टूटी हुई हो तो व्यक्ति को गुर्दे का रोग होता है।
  • दमा रोग- यदि हाथों का मध्य का भाग छोटा हो, स्वास्थ्य रेखा बिगड़ी हुई हो, बुध रेखा मस्तिष्क रेखा से मिले एवं शुक्र पर्वत से एक बारिक रेखा निकल कर आयु रेखा को पार करके मगंल क्षेत्र पर जाए तो दमा, खांसी एवं सांस लेने में परेशानी हो सकती है।
  • पीलिया रोग- यदि व्यक्ति को बुध रेखा पर नक्षत्र चिह्न एवं द्विप चिह्न हो और उसी स्थान पर काला धब्बा हो तो व्यक्ति को पीलिया रोग हो सकता है।
  • फेफड़े का रोग- मस्तिष्क रेखा पर शनि क्षेत्र के नीचे जंजीर जैसी आकृति हो तो व्यक्ति को फेफड़े तथा गले की बीमारी हो सकती है।
  • क्षय रोग- जिस व्यक्ति की हथेली में नाखून ऊंचे हो और मस्तिष्क रेखा शनि पर्वत से बुध पर्वत तक पंखदार होकर जा रही है तो व्यक्ति को क्षय रोग (टीबी) होने की संभावनाएं रहती हैं।
  • मिर्गी रोग- यदि उंगलियां टेढ़ी व नुकिली हो और उंगलियों के नीचे के पर्वत दबे हुए हों, नाखून लाल हो या उन पर छोटे चिह्न हों तो मिर्गी रोग हो सकता है।
  • पैर से संबंधित रोग- जिस वयक्ति की हथेली मे शनि पर्वत उच्च हो एवं रेखाएं भी अधिक हों तथा मस्तिष्क रेखा शनि पर्वत के नीचे टूट जाए तो व्यक्ति को पैरों में दर्द अथवा पैर से संबंधित रोग हो सकते हैं।
  • गठिया रोग- यदि व्यक्ति की स्वास्थ्य रेखा घिसी हुई सी छिन्न-भिन्न हो एवं चंद्र पर्वत से एक रेखा निकलकर आयु रेखा को काटती जाए तो गठिया रोग हो सकता है।
  • जलोदर- यदि चंद्र पर्वत पर नक्षत्र चिह्न हो और चंद्र पर्वत के नीचे का भाग उच्च होकर अनेक रेखाओं से कटा हुआ हो एवं उस पर भी नक्षत्र चिह्न हो तो व्यक्ति को जलोदर रोग हो सकता है।
  • एसिडिटी- चंद्र पर्वत अधिक उन्नत हो तो एसिडिटी रोग होने की संभावनाएं रहती हैं।
  • त्वचा रोग- यदि व्यक्ति के नाखून बासुंरी आकार के हो एवं हथेली की त्वचा कोमल हो तो व्यक्ति को त्वचा रोग हो सकते हैं।
  • लकवा रोग- नाखून छोटे व त्रिकोणाकार हों और शनि पर्वत उच्च होकर कई रेखाओं से कटा हुआ हो और उस पर नक्षत्र का चिह्न हो तथा चंद्र पर्वत पर जाल हो, मुख्य रेखाएं भी शुभ न हो तो व्यक्ति को लकवा रोग हो सकता है।

हथेेली में चतुष्कोण

हथेली पर जिस किसी भी रेखा के साथ या पर्वत पर चतुष्कोण बनता है। उस रेखा या पर्वत से संबंधित शुभ परिणामों को बढ़ाने वाला माना गया है। साथ ही टूटी रेखाओं के दोष को कम करने वाला माना गया है। हथेली पर चतुष्कोण की उपस्थिति हर तरीके से शुभ फल को बढ़ाने वाली होती है।

हथेली पर एक स्थान ऐसा भी जहां चतुष्कोण होने से विपरीत प्रभाव पड़ सकता है। वो स्थान है शुक्र पर्वत। शुक्र पर्वत पर चतुष्कोण अच्छा नहीं माना गया है। चतुष्कोण से शुक्र पर्वत पर क्या परिणाम होते हैं? इसका बारे में जानेंगे। चतुष्कोण के रेखाओं पर क्या परिणाम होते हैं, जानते हैं इसके बारे में

हथेली पर चतुष्कोण चार भुजाओं वाली एक चौकोर आकृति है। चार रेखाओं से बनने वाली ये आकृति टेड़ी-मेड़ी अलग-अलग लम्बाई व चौड़ाई वाली हो सकती है। चतुष्कोण की हथेली पर स्थिति कई प्रकार की परेशानियों से बचा सकती है।

यदि हथेली की कोई रेखा सही स्थिति में है और उस पर चतुष्कोण है तो यह उस रेखा से प्राप्त होने वाले शुभ परिणामों को अधिक बढ़ा देता है। यदि रेखा टूटी हुई है तो यह उसके बुरे प्रभावों को कम करने वाला होता है। साथ ही उस रेखा से होने वाले दुष्परिणामों को बदल भी सकता है।

लंबी जीवन रेखा पर चतुष्कोण की उपस्थिति उम्र को बढ़ाने वाली मानी गई है। यदि जीवन रेखा टूट रही हो और उस पर चतुष्कोण की उपस्थिति हो जाए तो यह शारीरिक तकलीफों को कम कर सकता हैं।

यदि हथेली पर कहीं नीले, काले या लाल बिंदु का निशान हो और यदि उसके पास कहीं चतुष्कोण बन रहा हो तो यह विस्फोटक पदार्थों से शरीर की सुरक्षा करता है।

  • किसी भी हथेली में विवाह रेखा सीधी जाती हुई दिखाई देती है। यह रेखा सबसे छोटी अंगुली के नीचे बुध पर्वत पर स्थित होती है। यदि विवाह रेखा सीधी न चलकर नीचे की ओर झुक रही हो या आकार में गोल हो रही हो। यह स्थिति जीवनसाथी के स्वास्थ्य के लिए अच्छी नहीं मानी गई है। विवाह रेखा में दोष हो और उस पर चतुष्कोण बन जाए तो जीवनसाथी के जीवन से जुड़ी परेशानियों में राहत प्रदान करता है।
  • हथेली में भाग्य रेखा के टूटे होने से बनते कार्योंं में रुकावटें आती हैं। ऐसे में चतुष्कोण भाग्य रेखा के पास कहीं बन जाए तो इंसान के जीवन में आगे बढ़ने में कितनी ही दिक्कतें आए लेकिन वह सफल होता है।
  • मंगल पर्वत हथेली में दो जगह होता है। एक तो जीवन रेखा के ठीक नीचे अंगूठे के पास वाले स्थान पर होता है। दूसरा हृदय रेखा के ठीक नीचे मस्तिष्क रेखा के पास वाले स्थान पर होता है।
  • मंगल पर्वत की दबी हुई स्थिति साहस की कमी करती है। मंगल पर्वत पर चतुष्कोण होने से साहस की कमी होने पर भी हार का मुंह नहीं देखना पड़ता है। वहीं शत्रु भी अपने आप रास्ता बदल लेते हैं।
  • शनि पर्वत के अशुभ स्थिति में होने पर झुकाव ऐसे कार्यों की ओर हो जाता है जिन्हें करने से समाज का व स्वयं का अहित हो सकता है। चतुष्कोण बुरी संगत में या गलत कार्य में झुकाव हो जाने पर बाहर निकाल लेता है। ऐसा इंसान आगे चलकर समाज के कल्याण के लिए अच्छे कार्य करने लगता है।
  • मस्तिष्क रेखा का अधिक लंबा होना मानसिक रूप से असंतोष देने वाला माना गया है। यह स्थिति जीवन में निराशा भी बढ़ा सकती है। यदि चतुष्कोण की उपस्थिति मस्तिष्क रेखा पर हो जाए तो निराशा से उबारता है। साथ ही मानसिक रूप से संतुष्टि का भाव देता है।
  • हृदय रेखा पर चतुष्कोण की उपस्थिति होने से ऐसा व्यक्ति में मनोबल अधिक होता है। साथ ही हृदय रेखा के अशुभ स्थिति में होने पर हृदय से संबंधी रोगों में बचाव करती है।
  • शुक्र पर्वत ऐसा स्थान है जहां चतुष्कोण का पाया जाना शुभ परिणाम नहीं देता है। शुक्र पर्वत पर चतुष्कोण के होने से किसी भी प्रकार की सजा या जुर्माने भरने का फल हो सकता है।

हथेली का रंग

ज्योतिष शास्त्र की कई विधाओं में से एक है हस्तरेखा ज्योतिष, जिसमे हाथो की रेखाओ का अध्ययन कर आपके भविष्य, स्वभाव, स्वास्थ्य, व्यवसाय आदि के बारे में बताया जाता है।  इसी हस्तरेखा ज्योतिष में इंसान की हथेलियों के रंगों का अध्ययन कर के भी इंसान के बारे में कई बातें बताई जाती है। वैसे तो यह काम निपुण हस्तरेखा विशेषज्ञ ही ढंग से कर सकते है।

हथेली का रंग पीला होना

यदि किसी व्यक्ति की हथेली का रंग पीला दिखाई देता है तो यह शुभ लक्षण नहीं होता है। पीले रंग की हथेली व्यक्ति की कमजोरी की ओर इशारा करती है। ऐसी हथेली वाले लोगों को कई प्रकार की बीमारियां होने का भय बना रहता है। यदि किसी स्त्री की हथेली का रंग पीला है तो वह पुरुष की ओर जल्दी आकर्षित हो जाती है और यदि किसी पुरुष की हथेली का रंग पीला है तो वह किसी स्त्री की ओर जल्दी आकर्षित हो जाता है। इस प्रकार की हथेली वाले लोगों को स्वास्थ्य संबंधी सावधानियां रखनी चाहिए। खान-पान में किसी भी प्रकार असावधानी, इन्हें बहुत जल्दी बीमारी कर सकती है।

हथेली का रंग मटमैला

जिन लोगों की हथेली मटमैले रंग की होती है, वे जीवन में अधिकांश समय दरिद्रता का सामना करते हैं। धन की कमी के कारण ये लोग निराश हो जाते हैं। ऐसी हथेली वाला व्यक्ति कड़ी मेहनत के बाद भी आवश्यकताओं की पूर्ति नहीं कर पाते हैं। आमतौर पर ऐसे लोग कार्यों में झूठ का सहारा भी लेते हैं। इन्हें अपने स्वास्थ्य का पूरा ध्यान रखना चाहिए।

हथेली पर दाग-धब्बे

यदि किसी व्यक्ति की हथेली पर दाग-धब्बे दिखाई देते हैं तो वे लोग नशे की लत के शिकार हो सकते हैं। ऐसे लोगों का जीवन सामान्यत: सुख-सुविधाओं के अभाव में व्यतीत होता है। ध्यान रखें, हस्तरेखा से भविष्य देखने के लिए दोनों हाथों की पूरी स्थिति का अध्ययन अतिआवश्यक है। इसके बाद ही कोई सटीक भविष्यवाणी की जा सकती है।

हथेली का रंग सफेद

निस्तेज सफेद रंग- निस्तेज सफेद रंग का अर्थ है कि ऐसा सफेद रंग जिसमें किसी प्रकार की चमक ना हो, आभाहीन सफेद रंग की हथेली, सूखी-सूखी हथेली दिखाई देना। जिन लोगों की हथेली ऐसी होती है, वे उत्साही नहीं होते हैं। किसी भी कार्य के प्रति इन लोगों में कोई उत्साह नहीं होता है। आमतौर पर ऐसे लोग अकेले में रहना पसंद करते हैं। किसी भी समारोह या पार्टी में इनका मन नहीं लगता है। कार्यों के प्रति अकर्मठ रहते हैं, इस वजह से इन्हें महालक्ष्मी की कृपा प्राप्त नहीं हो पाती है। इनके जीवन में धन की कमी बनी रहती है। इस कारण इनके जीवन में अधिकांश समय कठिन परिस्थितियां रहती हैं। चमकदार सफेद रंग- जिन लोगों की हथेली सफेद रंग की है और वह चमकदार है, सुंदर दिखाई देती है तो ऐसे लोगों का मन आध्यात्म की ओर होता है। इस प्रकार की हथेली वाले लोग अद्भुत शक्तियों के मालिक होते हैं। कार्यों को पूरी तन्मयता और उत्साह के साथ पूर्ण करते हैं। ये लोग शांति प्रिय होते हैं।

हथेली का रंग लाल

जिन लोगों की हथेली का रंग लाल होता है, साथ ही हथेली चमकदार और चिकनी दिखाई देती है तो उन लोगों पर महालक्ष्मी की विशेष कृपा होती है। ऐसे लोगों के जीवन में सभी सुख-सुविधाएं रहती हैं। हस्तरेखा ज्योतिष के अनुसार लाल रंग की हथेली बहुत शुभ होती है। ऐसी हथेली वाले लोगों को समाज में मान-सम्मान भी मिलता है। आमतौर पर ऐसी हथेली वाले लोग उच्च स्तरीय कार्य करते हैं। ये लोग अधिक शारीरिक श्रम से बचे रहते हैं।लाल रंग की हथेली वाले लोग स्वभाव से भावुक और थोड़े क्रोधी होते हैं। कभी-कभी इन्हें छोटी-छोटी बातों पर क्रोध आ जाता है। साथ ही, इन लोगों के विचारों में अस्थिरता रहती है।

हथेली का रंग गुलाबी

गहरा गुलाबी- जिस व्यक्ति की हथेली का रंग गहरा गुलाबी दिखाई देता है, वह शाही सुख प्राप्त करने वाला होता है। यदि इन लोगों की छोटी-छोटी बातें भी पूरी नहीं होती हैं तो इन्हें क्रोध आ जाता है। हालांकि, ये लोग बहुत जल्दी खुश भी हो जाते हैं। इन लोगों के विचार बदलते रहते हैं, आज जिस बात को सही बता रहे हैं, उसी बात को कल गलत भी बता सकते हैं।

हल्का गुलाबी- जिन लोगों की हथेली का रंग हल्का गुलाबी दिखाई देता है, वे लोग अच्छे स्वभाव और उच्च विचारों वाले होते हैं। घर-परिवार और समाज में अपने गुणों के कारण मान-सम्मान प्राप्त करते हैं। किसी भी कार्य को पूर्ण धैर्य और शांति के साथ पूर्ण करते हैं। इस प्रकार की हथेली वाले लोग हर हाल में सदैव प्रसन्न रहते हैं।