लय से बनें भाग्‍यशाली rhythmic good luck

प्रकृति (nature) की अपनी लय होती है। अगर इंसान प्रकृति की लय के साथ ताल मिलाकर चले तो अधिकांश सांसारिक समस्‍याओं का समाधान हो सकता है। ज्‍योतिष के अनुसार जिस जातक का अच्‍छा समय चल रहा होता है वह प्रकृति की लय के साथ होता है, वहीं समय खराब होने पर जातक की प्रकृति के साथ लय बिगड़ जाती है और वह दुःख पाने लगता है। अगर आप लय में हैं तो भाग्‍यशाली हैं (rhythmic good luck)

ज्‍योतिष (astrology) से हम जान सकते हैं कि अमुक जातक की नैसर्गिक वृत्ति क्‍या है। अगर वह उसके अनुसार आचरण करे तो खराब समय में भी अपनी लय (rhythm) पा सकता है और बेहतर परिणाम हासिल कर सकता है। जातक की प्रकृति जानने से पूर्व हमें ग्रहों और राशियों की मूल प्रकृति को समझना होगा। हर राशि जहां सवा दो नक्षत्रों से मिलकर बनती है वहीं ग्रह नक्षत्रों से मिल रही रश्मियों को जातक तक पहुंचाकर अपने प्रभाव देते हैं। आइए जानते हैं क्‍या होती है ग्रहों और राशियों की मूल प्रकृति।

ग्रहों की प्रकृति (Nature of planets)

सूर्य (sun) में उष्‍णता के साथ रूखापन (dryness) है। इसका तेज अधिक होता है। सूर्य की नियमितता सूर्य प्रभावित जातक में भी नजर आती है। इसका स्‍वभाव पालक (nurture) का होता है। यह भव्‍य, निर्भय, पवित्र और सच्‍चाई लिए होता है। अगर सूर्य का प्रभाव खराब हो तो गर्वीला, हमदर्दी न दिखाने वाला, एकाकी और हमेशा झगड़े के लिए उद्धत नजर आने वाला जातक होता है।

चंद्रमा (moon) शीतल ग्रह है। इस ग्रह से प्रभावित जातक घर परिवार में मग्‍न रहने वाले, सदैव चिंतन करने वाले, भावुक हृदय (sometimes touchy), कविता करने वाले होते हैं। चंद्रमा का प्रभाव खराब होने पर जातक स्‍वार्थी (selfish) और दूसरों के सुख-दुख से विरक्‍त रहने वाला होता है।

मंगल (mars) को जाति से क्षत्रिय (marshal) माना गया है। यह तेज, उग्र, बलशाली, मेहनती और साहस से भरा होता है। मंगल प्रभावित जातक बहुत अधिक तार्किक (logical) और अनुशासनप्रिय (disciplined) होते हैं। सेना-पुलिस (military or police) के उच्‍च अधिकारियों (top officials) और प्रबंधन के शीर्ष स्‍थानों पर बैठे जातकों में मंगल का शुभ प्रभाव देखा जा सकता है। मंगल खराब होने पर जातक को क्रूर बना देता है। डाकू और लुटेरों का मंगल खराब होता है।

गुरु (Jupiter) भारी और धीमा ग्रह है। यह शुभ और पीत वर्ण (yellowish) है। गुरु प्रभावित जातक धीर गंभीर बने रहते हैं और समाज में अच्‍छी प्रतिष्‍ठा हासिल करते हैं। ऐसे जातकों का डील-डौल भी बड़ा होता है। ऐसे जातक जब भरी सभा में पहुंचते हैं जहां बैठने के लिए भी जगह नहीं होती, वहां सभा में कुछ लोग खिसककर या हटकर इनके लिए जगह बना देते हैं। गंभीर सौम्‍यता (soft decency) इन जातकों का प्रमुख गुण है।

बुध (mercury) सौरमण्‍डल के मुखिया सूर्य के चारों ओर तेजी से चक्‍कर लगाने वाला और छोटा ग्रह है। इससे प्रभावित जातक भी रोजाना के लेन-देन में होशियार होते हैं। इसलिए ट्रेडिंग में लगे होते हैं। शक्‍ल से थोड़े ढीले और बुद्धू (dumb or moron) से दिखाई देते हैं, लेकिन नैसर्गिक रूप से ये बुद्धिमान होते हैं। चेहरे पर दिखने वाली सुस्‍ती का यह आलम होता है कि बात करते समय इन जातकों को नीचे का जबड़ा (lower jaw) झूलकर लटक तक जाता है।

शुक्र (Venus) को राक्षसों का गुरु माना गया है। चेहरे पर सांवलापन और विलासिता (luxury) इन जातकों का प्रमुख गुण होता है। इनकी बातचीत में लगातार सुविधाओं और साधनों का उल्‍लेख रहता है। सुगंध और विलासी वातावरण के शौकीन ये लोग तभी सुखी हो पाते हैं जब इन पर लक्ष्‍मी (goddess laxmi) की पर्याप्‍त कृपा हो।

शनि (Saturn) धीमा और अंधेरे वाला ग्रह है। शनि को सूर्य एवं उनकी पत्‍नी छाया का पुत्र माना गया है, लेकिन इसके गुण सूर्य के ठीक विपरीत होते हैं। चुप रहने वाले और चिड़चिड़े। अपने काम में लगातार लगे रहते हैं। इनके पास थोड़ी देर बैठने के बाद व्‍यक्ति बोर होने लगता है। आमतौर पर ये लंबे कद के और दुनियादारी से दूर रहने वाले होते हैं। शनि का प्रभाव अधिक होने पर इनके चेहरे पर भी शनि की कालिख (blackish) का असर दिखाई देने लगता है।

राहू (Dragon head) दैत्‍य के केवल सिर वाला भाग है। राहू के प्रभाव में जातक केवल चिंतन (thinking or worrying) करता है। उस दौरान वह कोई परिणामजनक कार्य नहीं कर पाता है। अधिक सोचने और फितूरों से घिरे रहने के कारण इन जातकों की नींद भी प्रभावित होती है और ऐसे जातकों के आंखों के नीचे काले घेरे (dark circles) दिखाई देने लगते हैं।

केतू (Dragon tail) को मंगल का प्रतिनिधि माना गया है। इससे प्रभावित जातक आमतौर पर पतले ही होते हैं। ये लोग ऊर्जावान (energetic) होते हैं, लेकिन विचारवान (thinker) नहीं। अपने काम में लगातार लगे रहते हैं, बिना परिणाम के बारे में सोचे। समस्‍या आने पर ऐसे जातक खुद को ही समस्‍या का कारण मानने लगते हैं।

राशियों का प्रभाव (Effect of signs)

राशियों का वर्गीकरण कई आधारों पर किया गया है। मेष, मिथुन, सिंह, तुला, धनु और कुंभ राशियों को पुरुष राशियां बताया गया है वहीं वृष, कर्क, कन्‍या, वृश्चिक, मकर और मीन स्‍त्री राशियां हैं। सूर्य और मंगल जैसे पुरुष ग्रह पुरुष राशियों में बेहतर परिणाम देते हैं और चंद्रमा और शुक्र जैसे स्‍त्री ग्रह स्‍त्री राशियों में। गति के हिसाब से राशियां तीन प्रकार की हैं। मेष, कर्क, तुला और मकर राशियां चर राशियां हैं। वृष, सिंह, वृश्चिक और कुंभ स्थिर हैं और मिथुन, कन्‍या, धनु और मीन राशियां द्विस्‍वभाव राशियां हैं। चर राशियों वाले जातक तीव्र गति वाले, स्थिर राशि वाले जातक अपेक्षाकृत स्थिर रहकर काम करने वाले होते हैं। द्विस्‍वभाव राशि वाले जातक समय के अनुसार खुद को ढाल लेते हैं। तत्‍व के अनुसार राशियों को चार प्रकार में बांटा गया है। अग्नि, पृथ्‍वी, वायु और जल तत्‍व। मेष, सिंह और धनु राशियां अग्नितत्‍वीय है, वृष, कन्‍या और मकर राशियां पृथ्‍वीतत्‍वीय हैं। मिथुन, तुला और कुंभ राशियां वायुतत्‍वीय हैं और कर्क, वृश्चिक और मीन राशियां जलतत्‍वीय राशियां हैं।

उपचार का विज्ञान (Astrological remedies)

ज्‍योतिषीय उपचारों के दौरान जातक की मूल प्रकृति उसके लग्‍न और कारक ग्रह से देखी जाती है। इसी के साथ वर्तमान दशा का विश्‍लेषण किया जाता है। अगर जातक की अपनी कुण्‍डली के नैसर्गिक लय के साथ नहीं होता है तो उसे उस लय में लाने के लिए उपचार बताए जाते हैं।

जो जातक लय में हो और राहू, केतू या शनि की खराब दशा चल रही हो, उसे ग्रहों के दुष्‍प्रभाव को खत्‍म करने संबंधी उपचार बताए जाते हैं। कुण्‍डली के लग्‍न और कारक ग्रह के स्‍वभाव के अनुसार अगर ग्रह अनुकूल राशियों में बैठे हों तो जातक को साधन और सुविधाएं आसानी से मिलती हैं। इसी के साथ अगर जातक ग्रहों और राशियों के अनुकूल कार्यों में लगे हों तो सफलताएं भी तेजी से मिलती हैं। दूसरी ओर लग्‍न और कारक ग्रह प्रतिकूल राशियों में बैठ जाए तो जातक को सदैव साधनों का अभाव खलता रहता है और इच्छित को प्राप्‍त करने के लिए अधिक प्रयास करना पड़ता है। उपचार लय बिगड़ने से उत्‍पन हो रही बाधा को दूर करने में मदद कर सकते हैं।