शासक ग्रह (Ruling Planet) कृष्‍णामूर्ति पद्धत‍ि ऐसा महत्‍वपूर्ण घटक है जो कई बार न केवल सटीक संकेत देता है, बल्कि घटना की तिथि और समय तक के सटीक विश्‍लेषण करने की क्षमता ज्‍योतिषी को देता है। ऐसा ही एक प्रयोग जीबी कुसुबी बता रहे हैं। केपी ज्‍योतिष का अभ्‍यास करने वालों के लिए एक शानदार उदाहरण…

4 मई 1970 को सुबह एक डॉक्टर अपनी बेटी की कुंडली लेकर आये। उन्होंने कुंडली मुझे दिखाई और निवेदन किया कि मैं उनकी बेटी की शादी का अनुमान लगाऊं। जो कुंडली उन्होंने मुझे दिखाई थी, वह वैदिक ज्योतिष द्वारा बनी हुई थी। मैंने उनसे कहा कि वह कुंडली मेरे किसी काम की नहीं है।

यह सुन कर वह नाराज हो गये और उन्होंने मुझसे कहा कि यह कुंडली बहुत ही मशहूर ज्योतिषी ने बनाई थी। मैंने उनसे कहा कि बनाई होगी सर, लेकिन यह कृष्णमूर्ति पद्धति है और यह अकेली ही भविष्य की सारी बातों पर से पर्दा उठा सकती है। यदि उसे व्यवस्थित और वैज्ञानिक तरीके से किया जाये। वह यह जानकर उत्सुक हो गये तथा उन्होंने कहा कि मैं चाहे कोई भी पद्धति का प्रयोग करूं, लेकिन उन्हें सिर्फ अपनी बेटी की शादी के बारे में जानना था। मैंने उनसे निवेदन किया कि वह दोपहर को आयें, ताकि उस समय तक मैं अपना सारा काम ख़त्म कर सकूं। उन्होंने मुझे बताया कि वह 1 से 1-30 बजे के बीच आयेंगे। और जैसा कि मैंने कहा था, मैं अपना काम ख़त्म करके उनका इंतजार करने लगा। लेकिन समय बीतता रहा और वह नहीं आये। मुझे लगा कि मुझे उन्हें कृष्णमूर्ति के बारे में अच्छे से समझा देना चाहिए था। मैंने समय अपने पास लिखकर रख लिया।

समय-15:55 शाम  तारीख-4-5-1970

मैं शासक ग्रहों (RULING PLANETS) पर काम करने लगा, जो प्रोफ़ेसर कृष्णमूर्ति जी ने मुझे सिखाई थी, ताकि मैं महाशय के आने का पता लगा सकूं।

1 वार-सोमवार (चन्द्र), चन्द्र द्वारा शासित
2 केतू-चन्द्र अश्विनी (केतू) नक्षत्र में गोचर कर रहा था।
3 मंगल-चन्द्र मेष में गोचर कर रहा था।
4 बुध-बुध कन्या राशि में गोचर कर रहा था।
5 चन्द्र-लग्न नक्षत्र स्वामी।
6 चन्द्र-लग्न उप स्वामी

अत: चन्द्र, केतू, बुध और मंगल शासक ग्रह हैं। ये सभी ग्रह उस घटना के फलित होने का समय बताते हैं, जब यह सभी एक साथ चलेंगे। मैंने गणना की और एक समय निकाला। 19 डिग्री 57 कला 00 विकला। कन्या बुध की राशि में चन्द्र के नक्षत्र में केतू के उप में तथा मंगल के उप-उप में होगा। इसी तरह जो समय निकला, वो था 4 बज कर 34 मिनट 33 सेकेण्ड शाम। मैंने एक कागज़ के टुकड़े पर उनके आने का समय 4 बजकर 35 मिनट लिख दिया। जैसे ही डाक्टर साहब आये, मैंने उन्हें ये कागज का टुकड़ा दिया और उनसे उनके आने का समय देखने को कहा। उन्होंने कहा 4 बजकर 35 मिनट। उन्होंने फिर अपनी घड़ी में देखा, समय था 4 बजकर 35 मिनट। उन्होंने चिट खोली और देख कर अत्यंत ही प्रसन्न हो गये। उन्हें कृष्णमूर्ति पद्धति के बारे में अच्छे से समझ में आ गया तथा उन्होंने ये दुआ मांगी कि कृष्णमूर्ति पद्धति पूरी दुनिया में फैले और इसके उपयोग का लाभ पूरी दुनिया उठा सके। उसके बाद मैंने उनकी बेटी की शादी का समय निकाला अब हमें सिर्फ इन्तजार करना है और देखना है।

लेखक- जीबी कुसुबी