नई सुबह का आकर्षण सभी को होता है। हर दिन एक नया दिन। दुनिया में संघर्ष करने के लिए अतिरिक्‍त ताकत छह से आठ घण्‍टे तक दुनिया से कटे रहने के बाद लौट आती है। जैसे-जैसे दिन चढ़ता है दिन की परेशानियां सामने आती है। लड़ते हुए समय बीतता है और शाम ढ़लने (Evening) तक पक्षी घोंसलों में लौटते हैं। यह शुक्र (Shukra vichar) का काल होता है।

गोधूली बेला गायों के घर लौटते समय उड़ती धूल में समा जाती है। इंसान भी सूरज ढ़लने तक घर की ओर रुख करता है। लेकिन कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जिनके लिए शाम का समय अधिक नीरवता, अधिक असंतोष लिए होता है। कभी घर की चिंता तो कभी खुद की मानसिक समस्‍या।

कुल मिलाकर शाम के समय की अपनी खराब स्थिति को सुधारने के लिए सलाह देना शुरू करूं तो हजारों लोगों को सलाहें दे सकता हूं। हो सकता है हर व्‍यक्ति अलग तरह की समस्‍या से मुखातिब हो लेकिन कारण गिने चुने ही होंगे। ज्‍योतिष की नजर से केवल एक कारण बनता है वह है शुक्र का खराब होना। आंकड़ों के हिसाब से ही बात की जाए तो आँख मूंदकर कहा जा सकता है कि साठ प्रतिशत से अधिक लोगों की कुण्‍डली में शुक्र की स्थिति खराब होती है।

अब शुक्र के खराब होने से शाम का क्‍या संबंध है। स्‍पष्‍ट संबंध है। शाम छह से नौ बजे तक का समय शुक्र काल कहा गया है। सांसारिकता में सहज रखने वाला गुरु इस काल में साथ नहीं होता।

अब शुक्र का काल हो और किसी व्‍यक्ति की कुण्‍डली में शुक्र खराब स्थिति में हो तो क्‍या पूरी जिन्‍दगी ऐसा ही रहेगा कि शाम का समय खराब निकलेगा।नहीं। ऐसा कहना भी जल्‍दबाजी होगी। मुझे यह ऐसा सवाल लगता है जैसे किसी से कहा जाए कि आज दोपहर को सोया है तो यह आदमी पूरी जिन्‍दगी दोपहर के समय नींद लेगा।

वास्‍तव में कुण्‍डली में शुक्र की स्थिति के अलावा शुक्र की तात्‍कालिक स्थिति का भी फर्क पड़ता है। किसी की कुण्‍डली में शुक्र खराब स्थिति में है तो उसे अधिक बार शाम का खराब समय झेलना पड़ेगा, हां जिन लोगों की कुण्‍डली में शुक्र की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर है वे लोग कम बार ऐसी स्थिति से रूबरू होंगे।

अब अगला सवाल – अब जब पता है कि कुण्‍डली में शुक्र की स्थिति खराब है या फिलहाल खराब चल रही है तो इसका क्‍या इलाज किया जाएइस सवाल के कई जवाब हो सकते हैं। एक जवाब जो मैं आमतौर पर दिया करता हूं वह यह है कि शाम का समय घर के बाहर की क्‍यों न बिताया जाए।

इवनिंग वॉक, मंदिर या दोस्‍तों रिश्‍तेदारों से मिलने या घर के काम निपटाने के लिए बाहर निकला जा सकता है। इससे घर में बैठ कर शुक्र की पीड़ा भोगने से तो निजात मिलेगी।दूसरा जवाब है कि शुक्र का उपचार किया जाए। क्‍या उपचार, यह व्‍यक्ति पर निर्भर करता है। यानि कुण्‍डली देखकर उपचार बताया जा सकता है।

तीसरा जवाब है घर में पूजा स्‍थापित की जाए और शाम के समय पूरी तल्‍लीनता से पूजा की जाए। इससे ध्‍यान बंटेगा और शुक्र की पीड़ा कम होगी।

चौथा उपाय है घर की लक्ष्‍मी या कह दें शुक्र की प्रतिरूप अपनी पत्‍नी को खुश करने में समय बिताया जाए।पाँचवाँ उपचार है कि घर में शुक्र को फैलने के लिए पर्याप्‍त स्‍थान दिया जाए ताकि वह बेहतर परिणाम देना शुरू कर दें।

शुक्र के फैलने का यहां अर्थ होगा कि घर में शाम के समय रोशनी की मात्रा अधिक रखी जाए, कांच का प्रयोग अधिकांश स्‍थानों पर किया जाए (मुंह देखने के लिए नहीं, सजावट के लिए) इसके अलावा विलासिता की सामग्री जुटाई जाए जो आपको मानसिक रूप से व्‍यस्‍त रखे।

एक बात का ध्‍यान रखिएगा शाम के वक्‍त बीवी के मुंह से निकले बोलों को अनसुना करना गृह क्‍लेश को बढ़ाएगा इसलिए शाम के समय उनकी बातों को तो कृपया अधिक सावधानी और तन्‍मयता से सुनने का प्रयास ही कीजिएगा।